सारबंगाली जीवन में कृतिवासी रामायण का प्रभाव
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सार
भारत के राष्ट्रीय जीवन में लिखे गए दो महाकाव्यों में से एक बाल्मीकि द्वारा रचित रामायण है। रामायण का अनुवाद भारत की क्षेत्रीय भाषाओं सहित दुनिया की अन्य भाषाओं में किया गया है। बंगाली में अनुवादित सबसे लोकप्रिय रामायण कृतिबास की ‘श्रीराम पांचाली’ है। हम चर्चा करेंगे कि कैसे कृतिवासी रामायण ने बंगाली जीवन को प्रतिबिंबित और प्रभावित किया। कृतिवासी रामायण मध्यकालीन बंगाली भाषा और साहित्य के उदाहरणों में से एक है। कृतिबास ओझा उत्तर भारत में रामायण के पहले अनुवादक थे। उनकी अनुवादित पुस्तक का नाम 'श्रीराम पांचाली' है। कृतिबास की रामायण का प्रकाशन श्रीरामपुर के पुजारियों ने १८०३ ई. में किया था। कृतिबास का जन्म नदिया जिले के फुलिया गांव में हुआ था। उनके पिता का नाम बनमाली माता मालिनी देवी था। कृतिबास की आत्मकथा के अनुसार उनका जन्म माघ मास के रविवार के दिन हुआ था।
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