Published January 4, 2026 | Version v1
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सप्त घातीय गणितीय ब्रह्म फलन (Cosmic Functional Form of Brahm ) (एक मौलिक गणितीय–वैज्ञानिक–ब्रह्माण्डीय फलन

Description

यह शोध  ग्रंथ निम्नलिखित मूल समीकरण से उद्भूत ब्रह्माण्डीय संरचना, ऊर्जा-वितरण तथा चरणबद्ध (त्रिभेद) विकास को गणितीय  रूप से सिद्ध करता है:  ब्रह्माण्ड अपनी ब्रह्म चेतना की सप्तम घात के समानुपाती है जिसका ब्रह्मांडीय फलन   निम्नानुसार है         

U(X) α X7e-x

U (X)= K X7e-x

ब्रह्म-फलनात्मक प्रारूप में X एक निराकार निर्वात-क्रमण पैरामीटर है, जो मूल कंपन-मोड्स की सुसंगठित उपलब्धता को नियंत्रित करता है, जबकि e-X पद एन्ट्रॉपी-प्रेरित असंगठन एवं अपरिवर्तनीय क्षय को निरूपित करता है। दोनों मिलकर एक गणितीय रूप से स्थिर तथा ऊष्मागतिकीय रूप से संगत संरचना-उद्भव तंत्र का निर्माण करते हैं। K एक निराकार (dimensionless) सामान्यीकरण स्थिरांक है, जो सात मूल स्वतंत्रता-डिग्रियों की संयोजकीय पूर्णता से उत्पन्न होता है। यह ब्रह्म-फलन के समग्र समाकलन को एकता (1) पर सामान्यीकृत करता है तथा कोई प्रायोगिक या समायोज्य (fitted) स्थिरांक नहीं है।

                                                                  कुंजी शब्द ( Key Words )

ब्रह्माण्डीय फलन, सप्तम-घात गणितीय मॉडल, त्रिभेद सिद्धांत, डार्क एनर्जी, गणितीय ब्रह्माण्ड विज्ञान

यह समीकरण एक सामान्यीकृत ब्रह्माण्डीय प्रायिकता वितरण (Gamma Distribution, n=7) का रूप है, जिसे सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड (1) में विभाजित किया गया है।

 

प्रस्तावना ( Introduction )

यह ग्रंथ 8 मुख्य प्रश्नों का उत्तर ,  वैदिक से आधुनिक क्वांटम भौतिकी तक के ज्ञान इतिहास में पहली बार गणितीय प्रमाण सहित वैज्ञानिक रूप से देता है जिन्हे वैज्ञानिक प्रयोग द्वारा   जाँच सकते है -

1. धरती के इतिहास में पहली बार ब्रह्माण्ड को गणितीय फलन के रूप में प्रस्तुतीकरण

2. श्रष्टि में प्रत्येक स्तर पर सृजन तीन से ही क्यों ?  त्रिभेद (तीन खंडों) का स्पष्ट गणितीय कारण

3. श्रष्टि में प्रत्येक स्तर  7 के बाद पुनरावर्ती (Recurrence) का स्पष्ट गणितीय गणितीय कारण

4. प्रथम बार दर्शन गणित प्राचीन वेद एवं  आधुनिक विज्ञानं का समागम के साथ एक ही सूत्र में प्रस्तुति

5. मानव नाड़ी तंत्र काल की ब्रह्म काल  तंत्र से पूरी तरह समरूपता

6. यह ब्रह्म फलन वैदिक गणना एवं वैज्ञानिक आकड़ो के साथ पूरी तरह समरूप सुपरभित परिमाण देता है

7. हबल स्थिरांक (Hubble Constant) की व्युत्पत्ति

 8. डार्क मैटर, डार्क एनर्जी एवं सामान्य पदार्थ की तुलनात्मक घनत्व-संगति

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