वीर सावरकर - एक सम्पूर्ण व्यक्तित्व
Authors/Creators
- 1. हिमालयीय यूनिवर्सिटी देहरादून
- 2. हिमालयीय यूनिवर्सिटी देहरादून
Description
वीर सावरकर हमारे देश की आजादी के संघर्ष में एक महान ऐतिहासिक क्रान्तिकारी थे। वह एक महान वक्ता, विद्वान,
कवि, लेखक, इतिहासकार, दार्शनिक एवं सामाजिक कार्यकर्ता थे। ऐसे स्वातन्त्र्यवीर, शौर्य, साहस व राष्ट्र भक्ति के पर्याय
वीर सावरकर के विषय में भी कुछ भ्रान्तियाँ फैलाई जाती है, जो बिल्कुल निर्मूल तथा आधारहीन हैं। सावरकर का सम्पूर्ण
जीवन एक खुली किताब है, उसमें भ्रांति के लिए कुछ है ही नहीं। इंडिया हाउस लन्दन में प्रथम भारतीय स्वतंत्रता संग्राम
की स्वर्ण जयन्ती के अवसर पर सावरकर ने अपने ओजस्वी भाषण में प्रमाणों सहित 1857 के संग्राम को गदर नहीं अपितु
भारत की स्वतन्त्रता का प्रथम संग्राम सिद्ध किया। सावरकर ने अपने राष्ट्रवाद को हिन्दुतव से जोड़ा, उस हिन्दुतव से जो
सनातनी परम्परा है, एक जीवन्त जीवन-पद्धति है, जो अपने आप में एक मानव-धर्म है, जिसने अखिल विश्व को
‘‘वसुधैवकुटुम्बकम्’’ के भाव के साथ देखा है, जिसने सारे संसार को ‘‘जियो और जीने दो’’ का मूलमंत्र दिया है, उस
‘हिन्दुत्व’ को सावरकर ने अपने राष्ट्रवाद में समाहित किया। वह भी सावरकर ही थे जिन्होंने जेल में ही पुस्तकालय की
स्थापना करा दी थी और अशिक्षित कैदियों को शिक्षा देने का काम शुरू किया था। सावरकर सशस्त्र-क्रान्ति के नायक थे,
एक असाधारण योद्धा, महान साहित्यकार, विद्वान, राजनीतिज्ञ एवं युगदृष्टा थे। सावरकर का पूरा जीवन बे-लाग था उन्होंने
जो कहा तथा जो किया निद्र्वन्द्व भाव से किया।
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Additional details
References
- 1857 का भावन स्वातंत्र्य समर
- हिन्दुः विनायक दामोदर सावरकर
- युग पुरूष-वीर सावरकर