चरखारी में पर्यटन की एक झलक
Description
This paper has been published in Peer-reviewed International Journal "Anthology The Research"
URL : https://www.socialresearchfoundation.com/new/publish-journal.php?editID=7991
Publisher : Social Research Foundation, Kanpur (SRF International)
Abstract : चरखारी उत्तर प्रदेश के बुन्देलखण्ड क्षेत्र में स्थित चित्रकूट धाम मण्डल के महोबा जनपद की एक तहसील है। भौगोलिक रूप से इसकी स्थिति 250 23‘ 54.39” उत्तरी अक्षांश एवं 790 56‘ 02.83” पूर्वी देशान्तर पर है। यह महोबा से 21 किमी0 दूर उत्तर- पश्चिम में स्थित है। सड़क मार्ग द्वारा महोबा, छतरपुर, खजुराहो, चित्रकूट, झाँसी एवं कानपुर से जुड़ा हुआ है। समीपस्थ रेलवे स्टेशन चरखारी रोड (इलाहाबाद-झांसी रेलमार्ग) है जो चरखारी से 10 किमी0 की दूरी पर स्थित है। चरखारी नगर को छत्रसाल के वंशज राजा खुमान सिंह ने सन् 1761 में बसाया था। उस समय से लेकर आजादी तक चरखारी उत्तर भारत की एक शक्तिशाली रियासत थी जिसका क्षेत्रफल 808 वर्ग मील तथा जनसंख्या 120351 थी। इनके अन्तिम शासक राजा जयेन्द्र सिंह थे।
हरी-भरी पहाड़ियों, उपत्यकाओं, कमलपुष्पों से आचछादित सरोवरों और जयपुर की तर्ज पर बने मनोहर बाजार को देख यहाँ आने वाले देशी-विदेशी र्प्यटकों ने इसे ‘बुन्देलखण्ड का हृदय‘, ‘बुन्देलखण्ड का कश्मीर‘ आदि उपमाओं से अलंकृत किया।
चरखारी में विजय सागर, जय सागर, गुमान सागर, मलखान सागर, रतन सागर तथा मदन सागर आदि रमणीय सरोवर गुमान बिहारी जू मनिदर, गोवर्धन नाथ जू मन्दिर, वासुदेव मन्दिर, माँ काली मन्दिर, त्रिकूट के मन्दिर आदि रमणीक देवालय, टोला तालब वन पार्क, ड्योढ़ी दरवाजा, राजमहल, मंगलगढ़ दुर्ग, गोवर्धन नाथ जू का मेला परिसर, रायल थियेटर, अर्जुन बांध आदि पर्यटन के केन्द्र स्थल हैं। शासन और राजनीतिक उपेक्षा का शिकार होकर यह पर्यटक स्थल अपनी दुर्दशा को झेल रहा है। यदि इस पर्यटन स्थल में पुनः सुधार कर ऐतिहासिक एवं पुरातात्विक महत्व के अवशेषों का पुनर्निमाण व सुरक्षा-संरक्षा कर मूलभूत सुविधाएं प्रदान कर दी जाये तो यहाँ पर्यटकों के आकर्षण का केन्द्र बनाया जा सकता है।
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- ISSN
- 2456-4397
Related works
- Is published in
- Journal article: 2456-4397 (ISSN)
Dates
- Submitted
-
2023-12-11
- Accepted
-
2023-12-18
References
- 1. विपिन कुमार, 1991, विकासोन्मुख भारतीय र्प्यटन उद्योग योजना, वर्ष-35, अंक-3, 542-योजना भवन, नई दिल्ली, पृ0- 9-10. 2. कुमारी कल्पना, 1974, पर्यटन यात्राओं का भौगोलिक महत्व, भूदर्शन, वर्ष-7, अंक-4, पृ0- 11-114, उदयपुर। 3. डॉ0 स्वामी प्रसाद एवं डॉ0 भवानीदीन, 2000, पर्यटन केन्द्र महोबा के विकास के अवरोधात्मक पक्ष, यू0 जी0 सी0 द्वारा आयोजित राष्टीªय सेमिनार (केन्द्र- राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय चरखारी), 02 फरवरी 2002 में प्रस्तुत शोधपत्र। 4. सहस्र श्री गोवर्धन नाथ जू मेला, 1996 स्मारिका, चरखारी (महोबा) पृ0 8-9. 5. दैनिक जागरण, 5 अप्रैल 2010, कानपुर, पृ0-6. 6. सहस्र श्री गोवर्धन नाथ जू मेला, 1996 स्मारिका, चरखारी (महोबा) पृ0 24-25 7. डॉ0 अजिर बिहारी चौबे, 2000, मंगलगढ़ दुर्ग, ऐतिहासिक विवेचन, यू0 जी0 सी0 द्वारा प्रायोजित राष्ट्रीय सेमिनार, 2 फरवरी 2000, स्थान- राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय चरखारी में प्रस्तुत शोध पत्र.