Published December 15, 2023
| Version Oct.-Nov.-Dec. 2023
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पंचतंत्र में काम मनोविज्ञान
- 1. प्राचार्य, आदित्य प्रकाष जालान टीचर्स टेªनिंग काॅलेज, कुदलुम, नगड़ी, राँची
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भारतीय मनोवैज्ञानिक चिंतन में मूल प्रवृत्तियों का प्रचलन कामशक्ति के कारण माना गया है। वास्तव में कोई भी प्रवृत्ति राग के कारण ही होती है और राग का दूसरा नाम है ‘काम’। काम से ही वासनाओं की उत्पत्ति होती है। अथर्ववेद में काम शब्द विकार के साथ इच्छा और कामना का भी वाचक है। काम मन का प्रथम बीज कहा गया है, यह अत्यधिक बलवान और शत्रु को मारने वाला है। वाणी इसकी पुत्री है। इसे न तो वायु ही पकड़ सकती है, न आग, न सूर्य और न ही चन्द्रमा ही। काम के सर्वविध वर्णन के साथ पंचतंत्र ने इसके निषेध व हानि को बताते हुये ंरक्षोपायों से भी अवगत कराया है। वह ‘नातिप्रसंगः प्रभदासु’ से जागृत करता है कि नारियों में अधिक आसक्ति नहीं रखनी चाहिए।
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Dates
- Issued
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2023-12-15Oct.-Nov.-Dec. 2023
References
- Kinsey, A.C., Ponnerory, W.B. & Martin, C.C., Sexual Behaviour in the Human Male, W.B. Savnderr Co. Philadelphia, 1948
- Freud, S. (1915) Instincts and their Vicissitudes, In Collected papers, Vol. IV, Basic Book Inc. N.Y. 1959
- 'Libido is natural energy and first and foremost reuses the purposes of life.' Frieda Fordham 'An Introduction to Jung's Psychology', Page 19