वैश्वीकरण के युग में स ंचार साधना ें क े माध्यमा ें स े भारतीय संगीत की बढ़ती लोकप्रियता
Authors/Creators
- 1. विभागाध्यक्ष वाद्य संगीत, म. ल. बा. शा. क. स्ना. महा. इन्दौर
Description
‘‘आ ना े भद्राः क्रतवो यन्तु विश्वतः।’’
अर्था त् - ‘हे परम प ्रकाशक परमात्मा सद्विचार सभी दिशाओं में आयें।
हमारे पूर्वज कितने दूर दृष्टा थ े, यह इस बात का द्योतक ह ै कि, जिस व ैश्वीकरण के महत्व का े शेष विश्व के लोग आज
समझ पाये ह ैं, उसे हमारे मनीषिया ें ने बह ुत पहते ही निर्धा रित कर ‘‘वसुधैव कुटुम्बकम्’’ की अवधारणा का े हमारी संस्कृति का
आधार बनाया।
वर्तमान समय में सम्पूर्ण विश्व में ह ुए तकनीकी विकास एवं संचार क्रान्ति के कारण समस्त विश्व ही एक ग्राम के समान ह ै,
क्या ेंकि संचार साधनों ने इसे इतना जोड़ दिया ह ै कि प ूरी दुनिया ही चंद कदमा ें एव ं कुछ घ ंटा ें की दूरी में सिमट र्गइ ह ै और
विश्व व्यापीकरण की प ्रक्रिया से पश्चिमीकरण प्रक्रिया में तेर्जी आइ ह ै।
इसी प्रक्रिया के परिणामस्वरूप आज भारतीय संगीत के पटल पर जा े शब्द सर्वाधिक सुर्नाइ दे रहा ह ै, वह है- ‘‘ग्लोबल
म्यूजि ़क’’। यह वह संगीत है, जा े व ैश्विक स्तर पर सुना जाता ह ै और जिसका उत्पादन-प्रकाशन और वितरण संगीत से
संब ंधित उद्योगा ें स े होता ह ै।
‘ग्ला ेबलाइज ेशन, भूमण्डलीकरण या व ैश्वीकरण का अर्थ है- ‘‘विश्व में चारों ओर अर्थव्यवस्थाओं का बढ़ता ह ुआ एकीकरण।’’
ब्लैक बेल डिक्शनरी आॅफ सोशिया ेलाॅजी के अनुसार- ‘भूमण्डलीकरण वह प्रक्रिया है, जिसके अन्तर्गत विभिनन समाजा ें का
सामाजिक जीवन, राजनीति और व्यापारिक क्षेत्र से लेकर संगीत, व ेशभ ूषा एव ं जनमिडिया के क्षेत्रा ें तक अन्तरराष्ट्रीय स्तर पर
अत्यन्त दु्रत गति से प्रभावित हुआ ह ै। व ैश्वीकरण अथवा भूखण्डलीकरण जैसी कल्पनाएँ भारतीय संस्कृति में प ्राचीन काल से
ही विद्यमान रही ह ै।
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