Published September 20, 2015
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SANT VILHOJI RACHIT HARIJAS : DHARMIK AAYAM
Description
जाम्भाणी साहित्य की परंपरा में संत वील्होजी का प्रमुख स्थान है। जाम्भाणी साहित्य को सर्वप्रथम लिपिबद्ध करने का श्रेय संत वील्होजी को ही जाता है। जाम्भाणी साहित्य में हरिजस प्रमुख विधा के रूप में विद्यमान है। संत वील्होजी रचित हरिजस आध्यात्मिक कोटि के होने के साथ-साथ विविध धारणाओं व विचारों से समन्वित है। इष्ट आराधना, भक्ति-भावना, आडंबरों व पाखंडों का विरोध, लीलागान आदि उनके हरिजस की मुख्य विशेषता है।
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