Published February 28, 2023
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प्रवासी कवयित्री पुष्पिता अवस्थी की कविता में 'माओरी' जनजाति की व्यथा
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प्रगति और आधुनिकता के इस दौर में भी आदिवासी समुदाय आज भी शोषित, पीडित और उपेक्षित हैं | राजनीतिक वर्ग स्वहित के लिये आदिवासियों को ढाल बनाकर कार्य साधते हैं परंतु अपना उल्लू सीधा होते ही उनका रुख, उनके प्रति परिवर्तित हो जाता है | जल, जंगल और जमीन के मालिक आदिवासी ही हैं जो कि आज भी अपनी अस्मिता को संजोकर रखे हुये हैं, ईमानदारी और प्रतिबद्धता के साथ | दूसरी ओर हमारा सभ्य और शिष्ट समाज है जो कि आदिवासियों के प्रति एक तरफ तो हेय दृष्टि रखता है, परंतु उनका अधिकार, जमीन और सम्पत्ति हडपने में उनका ईमान उन्हे अनुमति देता है | आदिवासी समूह नगरीय सभ्यता के कतिपय दोषों से मुक्त भी हैं, शायद इसीलिए निश्छल और स्वतंत्र हैं |
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