Published January 9, 2007 | Version v1

सार्थक वैचारिक हस्तक्षेप जनविकल्प [Sarthak Vaicharik Hastkshep Jan Vikalp]

Authors/Creators

  • 1. Dainik Jagran

Description

यह पटना से प्रकाशित लघु पत्रिका जन विकल्प के विमोचनसे संबंधित समाचार है, जो 9 जनवरी, 2007 को पटना से प्रकाशित हिंदी दैनिक समाचार पत्र दैनिक जागरण  में प्रकाशित हुआ था।

मासिक पत्रिका के रूप में जन विकल्प का प्रकाशन पटना से जनवरी, 2007 से दिसंबर, 2007 तक हुआ। इस बीच इसके कुल 11 अंक प्रकाशित हुए। पत्रिका के संपादक प्रेमकुमार और प्रमोद रंजन थे। महज एक वर्षों के प्रकाशन के दौरान ही पत्रिका ने अपनी समाजवादी वैचारिक धार के कारण अपनी एक विशिष्ट छवि बना ली थी।

दैनिक जागरण के साहित्य-संपादक प्रमोद कुमार सिंह ने इस समाचार में लिखा है: 

बिहार में अर्से से एक वैचारिक पत्रिका की कमी महसूस की जा रही थी। आम लोगों के सवालों को उठाने का एक शाब्दिक मंच जरूरी लगने लगा था। इसी को ध्यान में रखकर ‘जन विकल्प’ पत्रिका का प्रकाशन किया गया। यह स्वागतयोग्य पहल है। विगत दिनों आद्री के सभागार में ‘जन विकल्प’ का लोकार्पण करते हुए पूर्व विदेश सचिव व समान स्कूल शिक्षा प्रणाली आयोग के अध्यक्ष मुचकुंद दुबे ने कहा कि बिहार में बड़ी संख्या में पाठकों के होने के बावजूद एक वैचारिक पत्रिका की कमी थी। इस कमी को ‘जन विकल्प’ पूरा करेगा, ऐसा मेरा विश्वास है। उन्होंने कहा कि विचारों का संकट घातक है। इससे निपटने की दिशा में यह पहल प्रशंसनीय है। अरब के दोहा में ‘द ट्रिब्यून’ के संपादक अजित कुमार झा ने प्रिंट मीडिया के बाजार के बढ़ते हस्तक्षेप को खतरनाक बताया। विधान पार्षद  असलम आजाद ने हिंदी-उर्दू की मिलीजुली भाषाई संस्कृति पर विस्तार से प्रकाश डाला। आद्री के मानद सचिव शैवाल गुप्ता ने बिहारी उपराष्ट्रीयता के सवाल को रेखांकित किया। मंच संचालन करते हुए कवि मदन कश्यप ने पत्रकारिता के क्षेत्र में पूंजी के बढ़ते दखल की ओर इशारा करते हुए कहा कि इससे निटपने के लिए लघु पत्रिकाओं को समर्थ बनाना होगा। उन्होंने ‘जन विकल्प’ की कविता पुस्तिका में संकलित कविता ‘एक खत पागलखाना से’ को शताब्दी की सर्वश्रेष्ठ कविता बताया। इस मौके पर कथाकार संतोष दीक्षित व रमाशंकर आर्य ने भी इस पत्रिका की बाबत विचार रखे। पत्रिका के संपादक कथाकार-पार्षद प्रेमकुमार मणि ने धन्यवाद ज्ञापन करते हुए पत्रिका को बेहतर बनाने की अपनी प्रतिबद्धता जतायी। इस अवसर पर संपादक प्रमोद रंजन, मधुकर सिंह, नरेन, अरविंद यरवदा, मुसाफिर बैठा, अरूण नारायण, अनीश अंकुर, राजू रंजन, कासिम खुरशीद, शंभू सुमन, अशोक कुमार और जितेंद्र वर्मा सहित कई प्रबुद्धजन मौजूद थे। इस पत्रिका का प्रकाशन वैचारिक गैप को भरने में सहायक होगा, ऐसा वहां उपस्थित लोगों का मानना था।

 

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News_JAN VIKALP_Hindi Little Magazine_Dainik Jagran.pdf

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