संयुक्त तथा एकल परिवार के संदर्भ में महिलाओं के विचार का अध्ययन
Authors/Creators
- 1. Assist. Prof. Deptt. Of Education, D.A.V.(P.G.) College, Dehradun Uttarakhand
Description
सारांश –
व्यक्ति के सामाजीकरण के विकास में परिवार अपनी एक महत्वपूर्ण भूमिका प्रस्तुत करता है। बच्चा परिवार के सदस्यों, माता पिता एवं रिश्तेदारों से सीख कर अपने व्यवहार में परिवर्तन लाता है। लूसी मेयर के अनुसार “परिवार गार्यहस्थ समूह है जिसमें माता पिता और संतान साथ साथ रहते हैं। इसके मूल रूप में दम्पत्ति एवं उनकी संतान रहती है “। एक संयुक्त परिवार ऐसे व्यक्तियों का एक समूह है जो सामान्यतः एक ही घर में रहते हैं, जो एक ही रसोई में बना भोजन करते हैं, जो संपत्ति के सम्मिलित स्वामी होते हैं तथा जो सामान्य पूजा में भाग लेते हैं टुर जो किसी ना किसी प्रकार से एक दूसरे से रक्त संबंधी हो।एकल परिवार का मतलब एक ऐसी पारिवारिक संरचना से है जिसमे केवल पति-पत्नि और उनके अविवाहित बच्चे शामिल होते हैं। एकल परिवार पाश्चात्य संस्कृति की देन है। एकल परिवारों को आजकल न्यूक्लियर फैमिली भी कहा जाता है।इसमें परिवार का कोई भी व्यक्ति केवल उन्ही लोगों के प्रति उत्तरदायी होता है जो परिवार में है। ड़ा॰कपाड़िया ने “ नवीन न्याय व्यवस्था ,यातायात केनवीन साधन,औद्योगीकीकारण, शिक्षा के प्रसार तथा परिवर्तित मनोवृतियों को संयुक्त परिवार के विघटन के लिए उत्तरदायी माना गया है “। परिवर्तन ,समाज में विवाह ,परिवार के क्रिया कलाप, गतिविधि रहन सहन आदि मे बदलाव है। सामाजिक विघटन प्रकृति का एक नियम है । समाज प्रकृति का ही एक अंग है ,अतः समाज में बिघटन होता रहता है। संयुक्त परिवार के विघटन का प्रभाव समाज के सभी वर्गों में सामान्य रूप से पड़ा है। समाज में होनेवाले आर्थिक, सामाजिक, राजनैतिक तथा सांस्कृतिक विघटन किसी न किसी रूप में परिवार तथा समाज के सदस्यों को प्रभावित करते हैं, जिसका प्रभाव परिवार व उनके सदस्यों के रहन सहन संस्कृति एवं अनेक पक्षों और विचारों पर पड़ता है
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