महात्मा गांधी एवं राष्ट्रवाद
Authors/Creators
- 1. असिस्टेंट प्रोफेसर, राजनीति विज्ञान विभाग, रानी धर्म कुँवर राजकीय महाविद्यालय दल्लावाला, खानपुर, हरिद्वार (उत्तराखण्ड)
Description
गांधी जी भारत के व्यापक क्षेत्र में राजनीति को लेकर आए। देश के राष्ट्रीय आंदोलन में एक अभूतपूर्व सेनानी के रूप में
उनकी भूमिका रही। अतः भारतीय जनता ने अधिकांशतः उन्हें राजनीतिक नेता और देशभक्त राष्ट्रवादी के रूप में ही
अधिक स्वीकार किया है। निःसंदेह गांधी जी राष्ट्रवादी थे लेकिन जो राष्ट्रवाद आज दुनियां के लिए घातक हो रहा है
और जिसने विश्व की शांति के लिए भारी खतरा उत्पन्न कर दिया है, उस राष्ट्रवाद के समर्थक कभी भी गांधी जी नहीं
रहे। गांधी जी राजनीति की अपेक्षा नैतिक अधिक थे और इसलिए उनका राष्टवाद नैतिक साम्राज्य, जीवन की सहिष्णुता
और आध्यात्मिक सिद्धान्तों पर आधारित था। उनका राष्ट्रवाद वस्तुतः उनके विश्व प्रेम का शाश्वत सत्य था। गांधी जी
सकारात्मक राष्ट्रवाद के समर्थक थे जो देश के विभिन्न धार्मिक, भाषाई, जातिगत और सामुदायिक विभेदों को एक सूत्र में
जोड़ता है और कभी भी अपने को समूची मानवता से अलग नहीं समझता। उन्होंने राष्ट्रवाद को हमारे सामने अत्यन्त शुद्ध
रूप में प्रस्तुत किया। उनका विचार था कि मनुष्य का लक्ष्य विश्व मैत्री का होना चाहिए। हमें विश्व भ्रातृत्व के लिए
जीना-मरना चाहिए। गाँधी जी केवल सच्चे राष्ट्रवादी ही नहीं वरन् अंतर्राष्ट्रवादी भी थे। उनके आंदोलनों के पीछे त्याग
की भावना है कि मानव को अपने राष्ट्र से आगे जाकर संपूर्ण मानव जाति के साथ परस्पर स्नेह के साथ रहना चाहिए।
गाँधी जी की राष्ट्रवाद की अवधारणा वसुधैव कुटुम्बकम की भावना को परिलखित करती है।
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