महर्षि पतंजलि एवं स्वामी रामकृष्ण परमहंस का सामाजिक उत्थान हेतु योगदान
Authors/Creators
- 1. असिस्टेंट प्रोफेसर, योग विज्ञान विभाग, महात्मा गाॅधी चित्रकूट ग्रामोदय विश्वविद्यालय, चित्रकूट, मध्य प्रदेश
Description
योग का उद्देश्य केवल ईश्वर प्राप्ति ही नहीं है, बल्कि अभ्यन्तर तथा वाह्य जीवन का ऐसा परिपूर्ण उत्सर्ग और परिवर्तन है। जिसके द्वारा मन, बुद्धि, प्राण और दिव्य जीवन का रूपान्तर सम्भव है। जिससे आम मनुष्य भी प्राचीनकाल में अपने जीवन के अंतिम समय में गृहस्थ त्यागकर किसी शांत एकान्त जगह जाकर तपस्या करते थे या फिर यूँ कहें की मनुष्य जीवन और योग एक ही सिक्के के दो पहलू हैं अर्थात् ‘‘योग मानव के शारीरिक, मानसिक विकास के साथ पुरातन काल से जुड़ा है।’’ पूर्व भारतीय ऋषियों और मनीषियों ने अपनी कठिन साधना के निचोड़ को योग के माध्यम से शास्त्र रूप में प्रस्तुत किया है। इसी विद्या के अभ्यास से पूर्वकाल से लेकर अर्वाचीन समय तक लोग शारीरिक, मानसिक एवं आध्यात्मिक स्तर पर स्वस्थ्य, समृद्ध और सुखी रहने की गौरवशाली परंपरा चली आ रही है। जिस पर आज समूचे विश्व की दृष्टि भारत की इस सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक विरासत पर है, वह आज इस योग विद्या के अभ्यास से घातक एवं जानलेवा बीमारी से मुक्ति पा रहे है। आज स्वास्थ्य की खोज में एवं शांति की खोज में निकले योग जिज्ञासुओं की दृष्टि में योग ‘एक है कि अनेक’ यह प्रश्न महत्वपूर्ण है क्योंकि उनकी जिज्ञासा सीमित है परन्तु जो लोग योग को आत्मज्ञान, मोक्ष या मुक्ति का साधन बनाना चाहते हैं। उनके लिए योग के उक्त प्रकारों में से कोई भी लक्ष्य तक पहँॅंुचाने में सक्षम है।
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