Published June 18, 2026 | Version v1

मुकेश कुमार के कहानी संग्रह 'कर्ज से मुक्ति' में नारी शक्ति और आत्मनिर्भरता

Description

समकालीन हिंदी कथा-साहित्य में ग्रामीण जीवन, आर्थिक विषमता, किसान-समस्याएँ तथा स्त्री-संघर्ष प्रमुख विषयों के रूप में उभरकर सामने आए हैं। मुकेश कुमार का कहानी-संग्रह कर्ज से मुक्ति’ इसी सामाजिक यथार्थ को अभिव्यक्त करने वाला महत्वपूर्ण संग्रह है। इस संग्रह की कहानियाँ समाज के हाशिए पर स्थित वर्गों की पीड़ा, संघर्ष और जीवन-संघर्ष को यथार्थपरक ढंग से प्रस्तुत करती हैं। प्रस्तुत शोध आलेख में कहानी-संग्रह की प्रमुख कहानी ‘परिश्रम’ के आधार पर नारी शक्ति और आत्मनिर्भरता के स्वरूप का अध्ययन किया गया है। कहानी में एक किसान परिवार की आर्थिक विषमताओं और संकटपूर्ण परिस्थितियों के मध्य स्त्री की संघर्षशीलता, साहस, त्याग, श्रम तथा आत्मनिर्भर व्यक्तित्व को चित्रित किया गया है। अध्ययन से स्पष्ट होता है कि कहानी की नारी पात्र विपरीत परिस्थितियों में केवल परिवार की संरक्षिका के रूप में ही नहीं, अपितु आर्थिक, सामाजिक और नैतिक शक्ति के रूप में भी उभरती है। इस दृष्टि से यह कहानी ग्रामीण स्त्री चेतना तथा स्त्री-सशक्तिकरण की सशक्त अभिव्यक्ति है।

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