Published June 4, 2026 | Version v1

मानसिक स्वास्थ्य व कल्याण के संदर्भ में भारतीय ज्ञान प्रणाली की प्रासंगिकता (उपनिषद, योग, आयुर्वेद और गीता पर आधारित)

Description

भारतीय ज्ञान परंपरा स्वास्थ्य को केवल रोग-निवारण तक सीमित नहीं मानती, बल्कि उसे शरीर, मन, बुद्धि, आचरण और आत्मिक संतुलन की समेकित अवस्था के रूप में देखती है। योग, आयुर्वेद, उपनिषद और भगवद्गीता में मानसिक संतुलन, आत्मनियंत्रण, कर्तव्य-बोध, ध्यान, श्वास-नियमन और वैराग्य जैसे तत्त्वों को कल्याणकारी जीवन के आधार के रूप में प्रस्तुत किया गया है। समकालीन शोध भी संकेत करते हैं कि योगनिद्रा, योग-आधारित अभ्यास और गीता-प्रेरित मनोवैज्ञानिक व्याख्याएँ तनाव, चिंता और अवसाद जैसे मानसिक स्वास्थ्य संकेतकों में लाभकारी हो सकती हैं, यद्यपि कुछ क्षेत्रों में अभी अधिक कठोर अनुभवजन्य अनुसंधान की आवश्यकता है। यह शोध-पत्र भारतीय ज्ञान प्रणाली की स्वास्थ्य-दृष्टि का विश्लेषण करता है और विशेष रूप से मानसिक स्वास्थ्य एवं कल्याण के संदर्भ में उसकी समकालीन प्रासंगिकता पर विचार करता है। इसमें आयुर्वेद, अष्टांग योग, योगनिद्रा, नाद-उन्मुख साधना, भगवद्गीता, उपनिषद तथा शिक्षा में भारतीय ज्ञान-तत्वों के समावेशन की संभावनाओं की विवेचनात्मक समीक्षा प्रस्तुत की गई है।

Files

16 VOL.3 ISSUE 02 (19) डॉ. अल्पना शर्मा.pdf

Files (263.8 kB)

Additional details

Software