Published June 3, 2026 | Version v1
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डिजिटल मीडिया, सोशल मीडिया और जनमत निर्माण की प्रक्रिया

Description

डिजिटल मीडिया, सोशल मीडिया और जनमत निर्माण की प्रक्रिया आधुनिक समाज में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। ये माध्यम सूचनाओं के प्रसार, विचारों के आदान-प्रदान तथा सार्वजनिक चर्चाओं के माध्यम से लोगों की सोच को प्रभावित करते हैं, जिससे सामाजिक और राजनीतिक परिवर्तन संभव होते हैं। डिजिटल तकनीकों ने इस प्रक्रिया को अधिक तीव्र, व्यापक और विकेंद्रीकृत बना दिया है।

यूट्यूब, एक्स (पूर्व में ट्विटर), फेसबुक, इंस्टाग्राम तथा अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मों ने जनमत निर्माण की प्रक्रिया को नई दिशा प्रदान की है। इन माध्यमों ने तीव्र गति, सहभागिता और संवादात्मकता के माध्यम से लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं में महत्वपूर्ण परिवर्तन लाए हैं। अब सामान्य नागरिक भी अपने विचारों को व्यापक स्तर पर व्यक्त कर सकते हैं तथा विभिन्न सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक मुद्दों पर चर्चा में भागीदारी कर सकते हैं।

डिजिटल मीडिया और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म अपने प्रारंभिक सामाजिक संपर्क के उद्देश्य से आगे बढ़कर सार्वजनिक विमर्श के प्रभावशाली मंच बन गए हैं। ये न केवल सूचना प्रदान करते हैं, बल्कि लोगों की धारणाओं, विचारों और निर्णयों को भी प्रभावित करते हैं। जनमत निर्माण की इस प्रक्रिया में मीडिया की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण हो गई है।

प्रस्तुत लेख वर्तमान परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए सोशल मीडिया की लाभकारी तथा हानिकारक दोनों भूमिकाओं का विश्लेषण करता है। एक ओर सोशल मीडिया सूचना के त्वरित प्रसार, जन-जागरूकता, सामाजिक सहभागिता और लोकतांत्रिक अभिव्यक्ति को बढ़ावा देता है, वहीं दूसरी ओर फेक न्यूज़, भ्रामक सूचनाएँ, ट्रोलिंग, साइबर अपराध तथा वैचारिक ध्रुवीकरण जैसी समस्याएँ भी उत्पन्न करता है।

साथ ही, यह लेख इतिहास की कुछ महत्वपूर्ण घटनाओं का संक्षिप्त उल्लेख भी करता है, जहाँ संचार नेटवर्क और डिजिटल माध्यमों ने जनमत निर्माण तथा सामाजिक-राजनीतिक परिवर्तनों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इस प्रकार डिजिटल मीडिया और सोशल मीडिया आज के समय में जनमत निर्माण की प्रक्रिया के प्रमुख साधन बन चुके हैं, जिनका समाज पर व्यापक और गहरा प्रभाव पड़ रहा है।

 

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