Published June 3, 2026 | Version v1
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समकालीन वैश्विक परिप्रेक्ष्य में शिक्षा प्रणाली के बदलते आयाम और चुनौतियाँ

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समकालीन वैश्विक परिप्रेक्ष्य में शिक्षा प्रणाली तीव्र गति से परिवर्तनशील हो रही है। वैश्वीकरण, सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डिजिटल अधिगम तथा सामाजिक-आर्थिक परिवर्तनों ने शिक्षा के स्वरूप, उद्देश्यों और शिक्षण-पद्धतियों को व्यापक रूप से प्रभावित किया है।

वर्तमान समय में शिक्षा केवल ज्ञानार्जन का माध्यम नहीं रह गई है, बल्कि यह व्यक्तित्व विकास, कौशल निर्माण, नवाचार, नैतिक चेतना तथा वैश्विक नागरिकता के विकास का प्रमुख साधन बन चुकी है। डिजिटल शिक्षा, हाइब्रिड अधिगम, कौशल-आधारित शिक्षा, समावेशी शिक्षा तथा व्यक्तिकेंद्रित शिक्षण जैसी अवधारणाएँ शिक्षा के नए आयामों के रूप में उभरकर सामने आई हैं।

इसके साथ ही शिक्षा प्रणाली अनेक चुनौतियों का भी सामना कर रही है, जैसे— डिजिटल विभाजन, शिक्षा की गुणवत्ता में असमानता, शिक्षकों का तकनीकी प्रशिक्षण, शिक्षा एवं रोजगार के मध्य असंतुलन तथा मूल्य शिक्षा का अभाव। इन चुनौतियों के कारण शिक्षा के सार्वभौमिक और गुणवत्तापूर्ण स्वरूप को सुनिश्चित करना एक महत्वपूर्ण कार्य बन गया है।

यह शोध-पत्र समकालीन वैश्विक संदर्भ में शिक्षा प्रणाली के बदलते स्वरूप, उसके प्रमुख आयामों एवं उससे संबंधित चुनौतियों का विश्लेषणात्मक अध्ययन प्रस्तुत करता है। अध्ययन में यह स्पष्ट किया गया है कि आधुनिक शिक्षा को केवल तकनीकी रूप से उन्नत बनाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसे मानवीय मूल्यों, सामाजिक उत्तरदायित्व तथा नैतिक चेतना से भी समृद्ध करना आवश्यक है।

अध्ययन का निष्कर्ष यह है कि शिक्षा को तकनीकी रूप से उन्नत, समावेशी, मूल्यपरक तथा कौशलोन्मुख बनाना समय की आवश्यकता है, ताकि एक जिम्मेदार, संवेदनशील, सृजनशील और सक्षम वैश्विक नागरिक का निर्माण किया जा सके। इस दिशा में सरकारों, शैक्षिक संस्थानों, शिक्षकों तथा समाज के सभी वर्गों की सक्रिय भागीदारी अत्यंत महत्वपूर्ण है।

 
 
 

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डॉ. जी. उमानरसिंहा मूर्ति.pdf

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