Published September 1, 2021 | Version v1
Journal article Open

युवा सशाक्तिकरण पर स्वामी विवेकानंद के विचार

Authors/Creators

Description

शोध सारांश किसी भी देश के युवा उसका भविष्य होते हंै, उन्हीं के हाथों मंे देश की उन्नति की बागड़ोर होती है, आज के परिदृश्य में जहाँ भारत मंे चारों ओर समस्याओं का बोलबाला है, ऐसे माहौल में देश की युवाशक्ति को जागृत करना व उन्हें देश के प्रति कर्तव्यों का बोध करना अत्यन्त आवश्यक है। विवेकानन्द एक ऐसे व्यक्तित्व हैं जो प्रत्येक युवा के आदर्श बन सकते है। उन्होनें युवाओं का आहृवान करते हुए कहा था कि निराशा, कमजोरी, भय तथा ईष्र्या युवाओं के सबसे बडे़ शत्रु है। उन्होने ने युवाआंे को जीवन में लक्ष्य निर्धारित करने के लिए स्पष्ट संकेत दिया और कहा कि तुम सदैव सत्य का पालन करो, विजय तुम्हारी होगी। युवाओं से स्वामी विवेकानंद का प्रेम अपार था। वे, युवावस्था को संकल्प तथा भावनाओं से भरपूर अवस्था मानते थे। उन्हें ऐसे तेजस्वी युवा समुदाय की जरूरत थी जो देश के पुनर्गठन के लिए अपने प्राणों की बलि दे सकें । उनका मत था कि दिल दिमाग तथा हाथ का सम्यक् और संतुलित विकास होना चाहिए । वे युवकों में लोहे सदृश्य मांसपेशियों तथा फौलादी दृढ़ता के हिमायती थे।

Files

yuva-sashaktikaran-par-swami-vivekanand-ke-vichaar.pdf

Files (919.6 kB)