Published January 1, 2026
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भारतीय लोकतंत्र के चार मिथक
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राजनीति विज्ञान में हम लोकतंत्र को शासन की एक पद्धति के रूप में जानते हैं जबकि लोकतंत्र सामूहिक रूप से निर्णय लेने की उस प्रक्रिया का नाम है। जिस निर्णय का प्रभाव उस समूह पर पड़ने वाला है। इतिहासकारों एवं विद्वानों का एक वर्ग इस बात पर सहमत है कि भारत भूमि लोकतंत्र की जननी रही है (तंवर एवं कदम)।हालांकि जब भारत ने आजादी प्राप्त की तब इस बात पर संदेह व्यक्त किया गया कि भारत में लोकतंत्र सतत रूप से संचालित हो सकता है। दरअसल पश्चिमी विचारक एक ऐसे समाज में लोकतंत्र के सफल होने की संभावना देख ही नहीं पा रहे थे जो बहुलवादी हो, उनके हिसाब से लोकतंत्र की सफलता के लिए सजातीय (होमोजेनस) समाज होना पूर्व शर्त थी। लेकिन भारतीय लोकतंत्र की सफलता एवं सततता ने न केवल उनकीअवधारणाओं को गलत साबित किया बल्कि नए कीर्तिमान स्थापित किए है।
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