Published January 1, 2026
| Version v1
Journal article
Open
शिवप्रसाद सिंह के कथा साहित्य में भारत बोध
Authors/Creators
Description
प्रस्तुत शोध-पत्र आधुनिक हिंदी कथा साहित्य के मूर्धन्य रचनाकार डॉ. शिवप्रसाद सिंह के सृजन संसार में अंतर्निहित \\\'भारत बोध\\\' की अवधारणा को रेखांकित करने का एक प्रयास है। शिवप्रसाद सिंह का साहित्य केवल कथात्मक विन्यास नहीं है, अपितु वह भारतीय सभ्यता के सातत्य और उसकी जीवंतता का आख्यान है। इस अध्ययन के माध्यम से यह विश्लेषण किया गया है कि लेखक ने \\\'नीला चाँद\\\', \\\'वैश्वानर\\\' और \\\'गली आगे मुड़ती है\\\' जैसे कालजयी उपन्यासों तथा अपनी कहानियों में इतिहास, लोक-संस्कृति और आधुनिकता के त्रिकोण पर भारतीय अस्मिता को किस प्रकार परिभाषित किया है। शोध का मुख्य निष्कर्ष यह है कि शिवप्रसाद सिंह के यहाँ \\\'भारत बोध\\\' किसी संकुचित राजनैतिक परिधि में आबद्ध न होकर, गंगा-जमुनी संस्कृति, बनारसी जीवन-दर्शन और मानवीय मूल्यों की एक ऐसी समन्वयकारी शक्ति है जो अतीत के गौरव को वर्तमान की चुनौतियों से जोड़ती है। अध्ययन में सांस्कृतिक-ऐतिहासिक पद्धति और पाठ-विश्लेषण का प्रयोग करते हुए यह सिद्ध किया गया है कि उनका साहित्य भारतीयता को एक \\\'स्थिर जड़ता\\\' के बजाय एक \\\'गतिशील चेतना\\\' के रूप में प्रस्तुत करता है।
Files
ICSSHT.V4_issue_139.pdf
Files
(299.4 kB)
| Name | Size | Download all |
|---|---|---|
|
md5:ffe79426079d0fc606c5b4ce29bd1fa1
|
299.4 kB | Preview Download |
Additional details
Related works
- Has part
- Journal article: https://ijrtssh.com/wp-content/uploads/ICSSHT.V4_issue_139.pdf (URL)
- Is identical to
- Journal article: https://ijrtssh.com/2026/04/%e0%a4%b6%e0%a4%bf%e0%a4%b5%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%a6-%e0%a4%b8%e0%a4%bf%e0%a4%82%e0%a4%b9-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%95%e0%a4%a5%e0%a4%be-%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%b9/ (URL)