Published January 1, 2026 | Version v1

भारत मे वर्तमान वैश्विक चुनौतियाँ और उभरते विमर्श:

Description

\\nवर्तमान परिदृश्य में, भारत एक प्रमुख वैश्विक शक्ति के रूप में उभर रहा है, लेकिन उसे जटिल और बहुआयामी चुनौतियों का भी सामना करना पड़ रहा है। भारत को चीन तथा पाकिस्तान के साथ वास्तविक नियंत्रण रेखा पर तनावपूर्ण संबंधों और रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच पश्चिमी देशों के दबाव के बावजूद अपने रणनीतिक हितों को संतुलित करना पड़ रहा है। बांग्लादेश और नेपाल जैसे पड़ोसियों में राजनीतिक बदलावों के कारण अपनी \\\'पड़ोसी पहले\\\' नीति को नए सिरे से परिभाषित करना पड़ रहा है। वैश्विक अस्थिरता के कारण ऊर्जा सुरक्षा एक बड़ी चिंता है। इसके साथ ही, विकसित देशों में बढ़ रहे संरक्षणवाद के बीच अपनी निर्यात-आधारित अर्थव्यवस्था के लिए नए अवसर तलाशने पड़ रहे हैं। डिजिटलीकरण के साथ ही साइबर हमले, सूचना युद्ध और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे पर खतरे बढ़ गए हैं। वर्तमान में भारत दुनिया की 9वीं सबसे अधिक जलवायु-प्रभावित अर्थव्यवस्था के रूप में, आपदा प्रबंधन और नवीकरणीय ऊर्जा की ओर संक्रमण के बीच एक कठिन चुनौती का सामना कर रहा है। साथ ही खुद को \\\'ग्लोबल साउथ\\\' के नेता के रूप में स्थापित कर रहा है, जो विकासशील देशों की जरूरतों (गरीबी, बेरोजगारी, निरक्षरता, स्वास्थ्य सेवा, परिवहन विकास) को वैश्विक मंचों (G20, BRICS) पर उठा रहा है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता, ड्रोन और ग्रीन हाइड्रोजन जैसी उभरती तकनीकों में अपनी क्षमता बढ़ा रहा है और इन तकनीकों के वैश्विक नियमों को आकार देने में भाग ले रहा है। भारत \\\'गुटनिरपेक्ष\\\' के बजाय \\\'बहु-संलग्नता\\\' पर जोर दे रहा है, जहां वह QUAD और BRICS दोनों में शामिल होकर स्वतंत्र निर्णय ले रहा है। वही इसके सामने प्रमुख वर्तमान वैश्विक चुनौतियाँ और उभरते विमर्श मे \\\'डिजिटल इंडिया\\\' मॉडल, जिसमें यूपीआई (UPI) और आधार शामिल हैं, जो अन्य देशों के लिए एक मॉडल के रूप में पेश किया जा रहा है। वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में विविधीकरण और \\\'मेक इन इंडिया\\\' के माध्यम से विनिर्माण को आत्मनिर्भर बनाने का विमर्श प्रमुख है। आर्थिक विकास के बावजूद, युवाओं के लिए रोजगार के पर्याप्त अवसर पैदा करना एक प्रमुख घरेलू और वैश्विक चुनौती है। वर्तमान में, भारत का दृष्टिकोण \\\'संशोधन और संतुलन\\\' पर केंद्रित है, जहाँ वह विगत वर्षों की अस्थिरता के बाद पड़ोसी देशों के साथ संबंधों को फिर से मजबूत करने और वैश्विक शक्तियों के बीच संतुलन बनाए रखने का प्रयास कर रहा है। समाज में आर्थिक खाई और नफरत के माहौल को कम करना, जिससे देश की आंतरिक स्थिरता बची रहे। भारत अपनी अपार पर्यटन क्षमता का पूरी तरह से दोहन करने में पिछड़ रहा है। इस शोध पत्र मे वर्तमान वैश्विक चुनौतियाँ और उभरते विमर्श मुख्य रूप से भू-राजनीति, अर्थव्यवस्था, पर्यटन एवं सांस्कृतिक क्षेत्र और सुरक्षा के इर्द-गिर्द केंद्रित हैं। \\n

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