समाजवाद : अर्थ एवं स्वरूप
Description
समाजवाद आधुनिक राजनीतिक एवं आर्थिक विचारधाराओं में एक महत्वपूर्ण स्थान रखता है। यह ऐसी व्यवस्था का समर्थन करता है जिसमें उत्पादन के साधनों पर समाज या राज्य का नियंत्रण हो तथा समाज के सभी व्यक्तियों को समान अवसर और संसाधनों का न्यायपूर्ण वितरण प्राप्त हो। समाजवाद का मूल उद्देश्य आर्थिक असमानता को समाप्त करना और सामाजिक न्याय की स्थापना करना है। औद्योगिक क्रांति के बाद उत्पन्न सामाजिक-आर्थिक विषमताओं ने समाजवाद को एक सशक्त वैचारिक आंदोलन के रूप में विकसित किया। इस विचारधारा ने पूँजीवादी व्यवस्था की आलोचना करते हुए श्रमिकों के अधिकार, समानता और कल्याण को प्रमुखता दी।
समाजवाद केवल एक आर्थिक प्रणाली नहीं है बल्कि यह एक व्यापक सामाजिक-राजनीतिक दर्शन भी है, जो समाज में सहयोग, समानता और सामूहिक कल्याण के सिद्धांतों को महत्व देता है। विभिन्न विचारकों जैसे Karl Marx, Friedrich Engels, Robert Owen और Harold Laski ने समाजवाद के सिद्धांतों को विकसित करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
वर्तमान समय में भी समाजवाद सामाजिक न्याय, कल्याणकारी राज्य और लोकतांत्रिक समानता की अवधारणा से जुड़ा हुआ है। यह लेख समाजवाद के अर्थ, उत्पत्ति, प्रमुख विशेषताओं तथा उसके स्वरूप का विस्तृत विश्लेषण प्रस्तुत करता है।
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