Published March 14, 2026 | Version v1

भारतीय ज्ञान परंपरा और रामचरितमानस

Description

भारतीय ज्ञान परंपरा अर्थात जो ज्ञान वेदों ,उपनिषदों ,शास़्त्रीय ग्रंथ ,पांडुलिपियों  या मौखिक संचार के रूप में हजारों वर्षां से चला आ रहा है । भारतीय ज्ञान परंपरा का इतिहास प्राचीनतम संस्कृत ग्रंथों से जुड़ा हुआ है जैसे वेद,उपनिषद,भगवदगीता आदि ।यह परंपरा ध्यान ,साधना,तत्व ज्ञान और आत्म साक्षात्कार के माघ्यम से जीवन के गहरे अर्थ को जानने पर बल देती है ।

भारतीय ज्ञान परंपरा के प्रमुख स्तंभों में वैदिक साहित्य है ,जो भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिकता का आधार है । वैदिक साहित्य दार्शनिक शिक्षा,नैतिक सिद्धांत और व्यावहारिक ज्ञान के साथ-साथ प्राचीन भारत की गहन समझ और ज्ञान में अंतर्दृष्टि प्रदान कर हजारों वर्षां से भारतीय जीवन शैली को आकार देकर साहित्य ,कला सहित विभिन्न क्षेत्रों को प्रभवित करता रहा है।

भारतीय ज्ञान परंपरा में भक्ति का स्थान अत्यधिक उच्च रहा है । ज्ञान की परंपरा और भक्ति का  समन्वय भारतीय समाज को धार्मिक ,मानसिक और सामाजिक दृष्टि से समृद्ध करता है ।

भारतीय ज्ञान परंपरा के अंतर्गत भक्ति काव्यधारा की भूमिका महत्वपूर्ण है ।भारत में वाणिज्य ,प्रोद्योगिकी आदि क्षेत्रों में तीव्र प्रगति हुई है,परंतु भारतीय संस्कृति तथा परंपरा से अलगाव और मूल्यों में गिरावट भी देखी गई है।

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