Published January 31, 2026 | Version v1

बाणभट्ट की आत्मकथा, उपन्यास में चित्रित आधुनिक दृष्टिकोण: "बाणभट्ट का चरित्र चित्रण के संदर्भ में"

  • 1. सहायक प्राध्यापक, हिंदी विभाग, सदाशिवराव मंडलिक महाविद्यालय, मुरगूड

Description

शोधसार

उपन्यास साहित्य का उद्भव और विकास आधुनिक काल की देन है।बदलते परिवेश के अनुसार उपन्यास साहित्य लेखन के विषय भी बदलते आए हैं। आधुनिक काल में सामाजिक, राजनीतिक, राष्ट्रीय व्यक्तिगत और पारिवारिक विषयों के साथ-साथ नारी विमर्श पर भी अनेक उपन्यासकारों ने उपन्यास लिखें हैं, उनमें से आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी द्वारा लिखा गया 'बाणभट्ट की आत्मकथा' यह आधुनिक ऐतिहासिक उपन्यास है, जिसमें आधुनिक कालीन साहित्यिक प्रवृत्तियों का प्रभाव दिखाई देता है। इसमें नारी चेतना, समतावादी मूल्य, सामंती व्यवस्था की विडंबना का चित्रण आधुनिक विद्रोही नायक के माध्यम से किया है, जो स्वतंत्रता और आत्मबोध को उजागर करता है। बाणभट्ट पुरानी रूढ़ियों से बंधा नहीं है। वह एक कवि और विचारक है। जो प्रेम और मानवीय संवेदना का महत्व प्रस्तुत करता है। वह खुद को आश्रित मानने की दुविधा में है, जो उसे समकालीन साहित्य की पात्रों से जोड़ता है। जहां एक ओर सामंती समाज में नारी को भोग्या, वासना पूर्ति का साधन माना जाता था, जैसा भट्टिनी और निपुणिका के साथ होता है। वहां दूसरी ओर नारी को मानवीय गरिमा देने और उसकी निजता का समर्थन बाणभट्ट द्वारा किया है, जो एक प्रगतिशील सोच है। संक्षेप में द्विवेदी जी ने ऐतिहासिक पृष्ठभूमि का उपयोग करके तत्कालीन राजनीतिक, सामाजिक और व्यक्तिगत, शोषित पीड़ित नारी समस्याओं को उठाया है उपन्यासकारने बाणभट्ट जैसे चरित्र के माध्यम से आधुनिक और प्रगतिशील पुरुषों के बदलते दृष्टिकोण को प्रस्तुत किया है। पितृसताक समाज में युगों से महिलाओं पर अत्याचार होता आया है, उसी को यहां न्याय देने का काम लेखक ने किया है। 'बाणभट्ट की आत्मकथा में चित्रित नायक बाणभट्ट की चरित्रगत विशेषताओं से स्पष्ट होता है की, यह केवल ऐतिहासिक पात्र न रहकर आधुनिक प्रासंगिकता वाला पात्र है। वह एक आदर्श पुरुष, दार्शनिक और विद्रोही आत्मा के रूप में सामने आता है। जो एक स्त्री पुरुष संबंध, सामाजिक कुरीतियों और भारतीय पुराने और बदलते आधुनिक संस्कृति का प्रतिनिधित्व करता है।

 

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