'किन्नरों उनके संवैधानिक अधिकारों के प्रति जागरूकता का अध्ययन'
Description
किन्नर समुदाय भारतीय समाज का महत्त्वपूर्ण हिस्सा है, किंतु ऐतिहासिक रूप से उन्हें मुख्यधारा से अलग रखा गया है। अध्ययन से स्पष्ट होता है कि संवैधानिक एवं विधिक प्रावधानों के बावजूद उनकी वास्तविक सामाजिक-आर्थिक स्थिति संतोषजनक नहीं है। अधिकांश किन्नर गरीबी, अस्थिर आय और सीमित रोजगार अवसरों से जूझ रहे हैं। आज भी उनकी निर्भरता पारंपरिक पेशों—बधाई देना, नृत्य-गान और भिक्षावृत्ति पर बनी हुई है। आधुनिक शिक्षा और तकनीकी कौशल की कमी उनके आर्थिक सशक्तिकरण में बाधा बनती है। पारिवारिक बहिष्कार और सामाजिक अस्वीकृति के कारण वे भावनात्मक व मानसिक असुरक्षा भी झेलते हैं। यद्यपि सर्वोच्च न्यायालय के निर्णयों तथा ट्रांसजेंडर (अधिकारों का संरक्षण) अधिनियम, 2019 ने उनकी पहचान और अधिकारों को मान्यता दी है, परंतु इन प्रावधानों की जानकारी और लाभ अधिकांश तक नहीं पहुँच पाए हैं। संस्थागत संवेदनशीलता की कमी और सामाजिक पूर्वाग्रह इनके प्रभावी क्रियान्वयन में प्रमुख बाधाएं हैं।
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Additional details
Dates
- Issued
-
2025-12-30published
Software
- Repository URL
- https://cognitivethinking.in
References
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