बंगाल कला आंदोलन नंदलाल बोस के संदर्भ में
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चित्रकला का एक महत्वपूर्ण दौर आरंभ हुआ ।19वीं शताब्दी में जब बौद्धिक व सांस्कृतिक विकास चरमोत्कर्ष पर था तब अनेकों सुधारको जैसे राजा राममोहन राय, रविंद्र नाथ टैगोर का उदय भी इसी समय हुआ और बंगाल राष्ट्रीय पुनरुत्थान का मुख्य केंद्र बन गया। इसी काल में भारतीय कला को समर्पित ई. बी. हैवल एक प्रभावशाली अंग्रेजी कला प्रशासक थे तथा बंगाल के अन्य प्रतिभाशाली चित्रकारों जैसे अबनींद नाथ टैगोर और नंदलाल बोस के सहयोग से आधुनिक भारतीय चित्रकला का सर्वप्रथम व श्रेष्ठ विद्यालय बंगाल विद्यालय की स्थापना की गई। कला के इस नए आंदोलन के परिणाम स्वरुप भारतीय कला में समकालीन कला को भी शामिल किया जाने लगा इस काल के दौरान बंगाल की कता तथा ज्ञान के पुनर्जागरण के विभिन्न क्षेत्रों में मुख्य भूमिका निभाने वाला टैगोर परिवार ऐतिहासिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण था क्योंकि भारतीय चित्रकला के पुनर्जागरण में प्रमुख भूमिका निभाने वाले रविंद्रनाथ टैगोर, गंगेंद्र नाथ टैगोर, रतेंद्र नाथ टैगोर, अबनींद्रनाथ टैगोर, जैसे कई प्रतिभाशाली वर्ग बहुआयामी व्यक्तित्व वाले चित्रकार इसी परिवार के सदस्य थे
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