सड़क सुरक्षा - एक दार्शनिक चुनौती - डा0 उदित नारायण पाण्डेय
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Description
सड़क सुरक्षा एक बहुआयामी वैश्विक संकट है, जो तकनीकी, प्रशासनिक और आर्थिक चुनौतियों के साथ-साथ गहन दार्शनिक प्रश्न उठाता है। यह मानव जीवन के मूल्य, नैतिक जिम्मेदारी, व्यक्तिगत स्वतंत्रता बनाम सामूहिक कल्याण, सामाजिक न्याय तथा तकनीकी प्रगति की नैतिक दुविधाओं का मुद्दा है। भारत में सड़क दुर्घटनाएं एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्या बन चुकी हैं। 2024 में लगभग 4.73 लाख दुर्घटनाएं हुईं, जिनमें 1.77 लाख लोगों की मौत हुई- प्रतिदिन औसतन 485 मौतें। इसके प्रमुख कारणों में ओवर-स्पीडिंग (70 प्रतिशत मौतें, लगभग 1.24 लाख मामले), हेलमेट/सीट बेल्ट न पहनना (69,088 मौतें, जिनमें हेलमेट न पहनने से दोपहिया चालकों में 32,000 से अधिक मौतें), नशे में ड्राइविंग, मोबाइल फोन का उपयोग तथा अन्य यातायात नियम उल्लंघन (जैसे रेड लाइट जंपिंग, गलत साइड ड्राइविंग) शामिल हैं। यह अनुसंधान पत्र सड़क सुरक्षा को दार्शनिक दृष्टिकोण से विश्लेषित करता है। इसमें पाश्चात्य दार्शनिकों (जॉन लॉक, इमैनुएल कांट, जॉन स्टुअर्ट मिल, जॉन रॉल्स, हंस जोनास, प्लेटो) तथा भारतीय दर्शन की प्रमुख शाखाओं (चार्वाक, जैन, बौद्ध, सांख्य, न्याय, वेदांत) के सिद्धांतों को जोड़कर व्याख्या की गई है। प्रत्येक खंड में मूल उद्धरण, विस्तृत व्याख्या, व्यावहारिक उदाहरण तथा समाधान प्रस्तुत किए गए हैं, जो नीतिगत सुधारों और सामाजिक परिवर्तन के लिए मार्गदर्शन प्रदान करते हैं। विशेष रूप से, भारतीय दृष्टिकोण को गहराई से विस्तृत किया गया है, जहां दर्शन की प्राचीन जड़ें आधुनिक समस्याओं से जोड़ी गई हैं, तथा दार्शनिक समाधान अधिक प्रभावी बनाए गए हैं-व् यावहारिक नीतियों, उदाहरणों और क्रियान्वयन योग्य सुझावों के साथ।
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