बिहार की कृषि पारिस्थितिकी विरोधाभासी है। एक और जहां उत्तर बिहार में हिमालय से आने वाली नदियों के कारण बाढ़ की विभीषिका होती है वहीं दक्षिण बिहार में सूखे और जलस्तर की समस्या भी एक साथ दिखती है। बिहार के विभिन्न जिलों के फसल चक्र में भी अंतर साफ झलकता है- गोपालगंज में गन्ना, पूर्णिया में मक्का, भागलपुर में रेशम और आम और नालंदा में सब्जियां। इस तरह की विविधता से भरे बिहार में एक 'केंद्रीकृत संचार मॉडल' प्रभावी नहीं हो सकता। एक तरह के प्रसारण से पूरे राज्य के किसानों की समस्याओं का समाधान नहीं किया जा सकता। ऐसे में सामुदायिक रेडियो की 'हाइपर-लोकल' Hyper-local प्रकृति अपनी सार्थकता सिद्ध करती है। सामुदायिक रेडियो लगभग 10 से 15 किलोमीटर के क्षेत्रों तक प्रभावी होता है और यह उस खास सीमित क्षेत्र की सूक्ष्म जलवायु Micro-climate, मिट्टी और स्थानीय सामाजिक-आर्थिक मुद्दों को संबोधित करने में प्रभावी हो सकता है। बिहार में सामुदायिक रेडियो स्टेशनों का विकास 2006 की सामुदायिक रेडियो नीति के बाद से तेजी से बढ़ा है। वर्तमान में विभिन्न एनजीओ, कृषि विज्ञान केंद्रों और शिक्षण संस्थान कई सामुदायिक रेडियो स्टेशन चला रही है, जो कृषि के विकास में सहायक सिद्ध हो रही है ।
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बिहार की कृषि पारिस्थितिकी विरोधाभासी है। एक और जहां उत्तर बिहार में हिमालय से आने वाली नदियों के कारण बाढ़ की विभीषिका होती है वहीं दक्षिण बिहार में सूखे और जलस्तर की समस्या भी एक साथ दिखती है। बिहार के विभिन्न जिलों के फसल चक्र में भी अंतर साफ झलकता है- गोपालगंज में गन्ना, पूर्णिया में मक्का, भागलपुर में रेशम और आम और नालंदा में सब्जियां। इस तरह की विविधता से भरे बिहार में एक 'केंद्रीकृत संचार मॉडल' प्रभावी नहीं हो सकता। एक तरह के प्रसारण से पूरे राज्य के किसानों की समस्याओं का समाधान नहीं किया जा सकता। ऐसे में सामुदायिक रेडियो की 'हाइपर-लोकल' Hyper-local प्रकृति अपनी सार्थकता सिद्ध करती है। सामुदायिक रेडियो लगभग 10 से 15 किलोमीटर के क्षेत्रों तक प्रभावी होता है और यह उस खास सीमित क्षेत्र की सूक्ष्म जलवायु Micro-climate, मिट्टी और स्थानीय सामाजिक-आर्थिक मुद्दों को संबोधित करने में प्रभावी हो सकता है। बिहार में सामुदायिक रेडियो स्टेशनों का विकास 2006 की सामुदायिक रेडियो नीति के बाद से तेजी से बढ़ा है। वर्तमान में विभिन्न एनजीओ, कृषि विज्ञान केंद्रों और शिक्षण संस्थान कई सामुदायिक रेडियो स्टेशन चला रही है, जो कृषि के विकास में सहायक सिद्ध हो रही है ।
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बिहार के कृषि विकास में सामुदायिक रेडियो की भूमिका.pdf
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