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विभिन्न आयोगों द्वारा स्वतंत्र भारत में नारी शिक्षा के संदर्भ में दिए गए सुझावों का विवेचनात्मक अध्ययन

  • 1. विभागाध्यक्ष, बी0एड0 विभाग जवाहर लाल नेहरू पी0जी0 कालेज, महराजगंज, उ0प्र0 (भारत)

Description

सार:- स्वतंत्र भारत में नारी शिक्षा को सामाजिक परिवर्तन, लोकतांत्रिक मूल्यों की स्थापना तथा राष्ट्रीय विकास का प्रमुख आधार माना गया है। स्वतंत्रता के समय भारतीय समाज में महिलाओं की शैक्षिक स्थिति अत्यंत पिछड़ी हुई थी। इस स्थिति में सुधार हेतु भारत सरकार द्वारा समय-समय पर विभिन्न शिक्षा आयोगों एवं समितियों का गठन किया गया। इन आयोगों ने नारी शिक्षा की समस्याओं, बाधाओं एवं संभावनाओं का गहन अध्ययन कर उसके विकास हेतु दूरदर्शी एवं व्यावहारिक सुझाव प्रस्तुत किए। प्रस्तुत शोध पत्र में विश्वविद्यालय शिक्षा आयोग (1948-49), माध्यमिक शिक्षा आयोग (1952-53), कोठारी आयोग (1964-66) तथा राष्ट्रीय शिक्षा नीतियों (1986 एवं 2020) द्वारा नारी शिक्षा के संदर्भ में दिए गए सुझावों का विवेचनात्मक अध्ययन किया गया है। अध्ययन से यह स्पष्ट होता है कि इन आयोगों की सिफारिशों ने नारी शिक्षा के विस्तार, गुणात्मक सुधार एवं महिला सशक्तिकरण में ऐतिहासिक भूमिका निभाई है।  

मुख्य शब्द:- नारी शिक्षा, शिक्षा आयोग, स्वतंत्र भारत, महिला सशक्तिकरण, शैक्षिक नीति।

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