हरित जीडीपी सतत विकास की कुंजी: भारत के संदर्भ में विश्लेषण
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- 1. सहाय्यक प्राध्यापक, राजनीती विज्ञान एस.एन. मोर महाविद्यालय तुमसर जि. भंडारा
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सामान्य पद्धतीसे देश के सकल घरेलू उत्पाद की वस्तू एवं सेवा की गिनती जीडीपी के अंदर होती है। सामान्य स्तर पर इसमे पर्यावरणीय ह्रास, प्राकृतिक संसाधनोका ह्रास, पर्यावरणीय बचत इन सभी का विचार किया जाने पर उसे ग्रीन अर्थव्यवस्था और उसके निर्देशांक को ‘ग्रीन जीडीपी’ कहा जा सकता है। भारतने घोषित हरित जीडीपी (ग्रीन जी.डी.पी.) तो नही अपनाई है, पर अनौपचारिक तौर पर भारत ग्रीन जी.डी.पी के रास्ते पर है। कुछ मर्यादाये पार कर भारत उसको हासिल कर लेंगा। भारत मे हरित जीडीपी का मापन की बडी समस्या है। सांख्यिकीय जानकारी संकलन का अभाव दिखाई देता है। ये जानकारी किस प्रकार से संकलित की जाये? ये बडी समस्या है। विश्वस्तरीय संस्थानों व्दारा किये गये अध्ययन, अनुमान एवं सांख्यिकीय प्राप्त जानकारी से अनुमान निकाले जाते है, परंतु सरकार के द्वारा स्पष्ट संदर्भ के जानकारी का अभाव दिखता है।भारत इस हेतु प्रयासरत है। आज भारत में राजनीतिक इच्छा शक्ति के कारण धरातल पर हरित जीडीपीके प्रयास हो रहे है कुछ मर्यादाये पार कर भारत सतत विकास लक्ष्योंको प्राप्त लेंगा।
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