मंजूर एहतेशाम का सूखा बरगद: रूढ़ियों की जकड़न से आधुनिकता ओर
Authors/Creators
- 1. शोधछात्र, किशोरी रमण स्नातकोत्तर महाविद्यालय, स्टेशन रोड, मथुरा, उत्तर प्रदेश (भारत)
Description
सार: हिन्दी साहित्य में उपन्यास एक ऐसी विधा है जो समाज की गतिशीलता, सांस्कृतिक परिवर्तनों और वैचारिक उथल-पुथल को दर्शाने का सशक्त माध्यम रहा है। समकालीन हिन्दी उपन्यास, जो बीसवीं सदी के अंत और इक्कीसवीं सदी की शुरुआत में लिखे गए, भारतीय समाज में रुढ़ियों और आधुनिकता के बीच चल रहे द्वंद्व को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करते हैं। रुढ़ियों वे स्थापित सामाजिक, सांस्कृतिक और धार्मिक मान्यताएँ हैं जो समाज को एक निश्चित ढाँचे में बाँधे रखती है, जबकि आधुनिकता तर्कशीलता, वैज्ञानिक दृष्टिकोण, व्यक्तिगत स्वतंत्रता और वैश्वीकरण की ओर उन्मुख होती है। यह शोध अध्याय समकालीन हिन्दी उपन्यासों में रुढ़ियों और आधुनिकता के स्वरूप, उनके परस्पर टकराव और सामंजस्य की खोज करता है।
मुख्य शब्द: हिन्दी साहित्य, सांस्कृतिक परिवर्तन, भारतीय समाज, मंजूर एहतेशाम, सूखा बरगद।
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