दीनदयाल उपाध्याय के सामाजिक समरसता और सर्वोदय के विचार
Description
यह शोध आलेख पंडित दीनदयाल उपाध्याय के सामाजिक न्याय और आर्थिक दृष्टिकोण का व्यापक विश्लेषण प्रस्तुत करता है। दीनदयाल उपाध्याय ने एकात्म मानववाद का दर्शन प्रतिपादित किया जो भारतीय संस्कृति और परंपरा पर आधारित एक समग्र विकास मॉडल है। उनका मानना था कि सामाजिक न्याय केवल आर्थिक समानता तक सीमित नहीं है बल्कि यह मानव के चतुर्विध विकास . शरीरए मनए बुद्धि और आत्मा . से संबंधित है। उन्होंने पूंजीवाद और समाजवाद दोनों की आलोचना करते हुए एक वैकल्पिक आर्थिक मॉडल प्रस्तुत किया जो व्यक्ति और समाज के बीच संतुलन स्थापित करता है। यह आलेख उनके विचारों की प्रासंगिकता को समकालीन भारतीय संदर्भ में विश्लेषित करता है और यह दर्शाता है कि कैसे उनकी विचारधारा आज भी विकास नीतियों को दिशा प्रदान कर सकती है। शोध पत्र में यह स्थापित किया गया है कि उपाध्याय का दृष्टिकोण न केवल सैद्धांतिक महत्व रखता है बल्कि व्यावहारिक नीति निर्माण में भी उपयोगी है।
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दीनदयाल उपाध्याय के सामाजिक समरसता और सर्वोदय के विचार.pdf
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Dates
- Submitted
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2025-12-12
- Accepted
-
2025-12-21
Software
References
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