आदिवासी समुदाय में बालिका शिक्षा चुनौतियाँ, हस्तक्षेप और सतत विकास की संभावनाएँ
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पृष्ठभूमि एवं अध्ययन का उद्देश्य
भारत में अनुसूचित जनजाति (ैज्) की बालिकाओं की शिक्षा, विकास और समावेशन के परिदृश्य में एक गंभीर असमानता प्रस्तुत करती है। पारंपरिक शिक्षा मॉडल इन समुदायों की अनूठी सामाजिक-सांस्कृतिक और आर्थिक वास्तविकताओं को संबोधित करने में प्रायः विफल रहे हैं। इस अध्ययन का प्राथमिक उद्देश्य आदिवासी बालिकाओं की शिक्षा में बाधक प्रणालीगत चुनौतियों (जैसे उच्च ड्रॉपआउट, सांस्कृतिक असंगति, शिक्षक-छात्र अनुपात) का समाजशास्त्रीय दृष्टिकोण से करना और सरकारी तथा गैर-सरकारी संगठनों द्वारा लागू किए गए नवाचारी शैक्षिक हस्तक्षेपों (प्ददवअंजपअम म्कनबंजपवदंस प्दजमतअमदजपवदे), करना है।भारत के सामाजिक ताने-बाने में, आदिवासी (अनुसूचित जनजाति) समुदाय की बालिकाएँ शैक्षिक पहुँच और परिणामों के मामले में सबसे वंचित वर्गों में से हैं। बालिका शिक्षा की उपेक्षा न केवल सामाजिक न्याय का उल्लंघन है, बल्कि यह मानव पूंजी विकास और सतत विकास लक्ष्यों (ैक्ळे) की प्राप्ति में भी एक बाधा है। प्रस्तुत शोध सार का उद्देश्य आदिवासी समुदाय में बालिका शिक्षा की वर्तमान स्थिति का आलोचनात्मक विश्लेषण करना, प्रमुख सामाजिक-आर्थिक और संस्थागत बाधाओं की पहचान करना, और इन चुनौतियों का सामना करने हेतु प्रभावी नीतिगत हस्तक्षेपों की रूपरेखा प्रस्तुत करना है।
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- https://www.mearf.info/mearfjournalshiksha-sahitya