समस्तीपुर जिला में भूमि उपयोग के बदलते प्रारूप का कृषि पर प्रभाव
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- 1. वरीय सहायक प्राध्यापक, राम मनोहर लोहिया स्मारक महाविद्यालय, मुजफ्फरपुर
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किसी भी मानव समुदाय के सामाजिक-आर्थिक विकास का प्रतिबिम्ब वहाँ के भूमि उपयोग प्रतिरूप से होता है। प्राकृतिक संसाधनों में भूमि अति महत्वपूर्ण एवं प्राथमिक संसाधन है। मानव की प्रत्येक क्रिया कलाप एवं उसकी मूलभूत और प्राथमिक आवश्यकता की पूर्ति प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से इसी संसाधन से होती है। भूमि उपयोग का स्वरूप मानव संसाधन के विकास और आवश्यकत के अनुसार परिवर्तित एवं परिमार्जित होता रहा है और यह हमारे पर्यावरण और समाज पर गहरा प्रभाव डालता है। भूमि उपयोग में परिवर्तन शहरीकरण, कृषि विस्तार एवं औद्योगीकरण के फलस्वरूप हुआ है। इस परिवर्तन से वहां के कृषि पर व्यापक प्रभाव पड़ा है जैसा कि हम जानते है कि भूमि किसी भी मानवीय क्रिया की आधारशिला होती है। समय के साथ जनसंख्या वृद्धि, शहरीकरण और आर्थिक गतिविधियों के कारण भूमि उपयोग के स्वरुप में परिवर्तन आ रहा है। शोध जिला समस्तीपुर एक प्रमुख कृषि क्षेत्र वाला जिला है जहां पर भूमि उपयोग में हो रहे परिवर्तन सीधे कृषि पर प्रभाव डाल रहे है। प्रस्तुत शोध इन्ही परिवर्तनों के भौगोलिक विश्लेषण पर आधारित है।
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