पैरी नदी में रेत खनन का पर्यावरणीय प्रभाव : एक भौगोलिक अध्ययन
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- 1. सहायक प्राध्यापक, भूगोल शास. वीर सुरेन्द्रसाय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, गरियाबंद
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रेत आधुनिक सभ्यता का एक अत्यंत आवश्यक किन्तु अनवीनीकरण प्राकृतिक संसाधन है। भवन, सड़क, बाँध एवं औद्योगिक निर्माण कार्यों में इसकी बढ़ती मांग ने नदी तंत्रों पर अभूतपूर्व दबाव उत्पन्न किया है। छत्तीसगढ़ की महानदी की सहायक नदी पैरी, गरियाबंद एवं धमतरी जिलों के लिए न केवल जल संसाधन बल्कि आजीविका और जैवविविधता की दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। वर्तमान अध्ययन में पैरी नदी में हो रहे नियोजित एवं अनियोजित रेत खनन के भौतिक, जैविक, सामाजिक तथा आर्थिक प्रभावों का विश्लेषण किया गया है। अध्ययन द्वितीयक आँकड़ों, फील्ड अवलोकन तथा उपलब्ध साहित्य पर आधारित है। परिणामस्वरूप यह स्पष्ट होता है कि रेत के अति-दोहन से नदी की आकृति, प्रवाह, भूजल स्तर, जैवविविधता एवं स्थानीय सामाजिक-आर्थिक संरचना पर गंभीर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहे हैं। अध्ययन में वैकल्पिक उपायों जैसे एम-सैंड, सीएंडडी अपशिष्ट पुनर्चक्रण, सख्त निगरानी एवं जनजागरूकता को समाधान के रूप में प्रस्तावित किया गया है।
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