वैश्वीकरण के युग में भारतीय पारंपारिक मुल्यों की प्रासंगिकता
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- 1. Dept. of Music, Late Chhaganlal Muljibhai Kadhi Kala, Mahavidyalaya, Achalpur Camp, Paratwada, Dist. Amravati, Maharashtra
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वैश्वीकरण ने विश्व को एक वैश्विक गांव में परिवर्तीत कर दिया है, जहाँ संस्कृती, अर्थव्यवस्था, शिक्षा, तकनिक और जीवनशैली निरंतर एक-दुसरे से प्रभावित हो रहे है | इस प्रक्रिया ने भारत जैसे प्राचीन सभ्यतावाले देश के लिए अनेक अवसरों के साथ चुनौतियाँ भी उत्पन्न की है | भारतीय पारंपारिक मुल्य जैसे- सत्य, अहिंसा, कर्तव्य सहिष्णूता, करुणा, सामुहिकता और वसुधैव कुटुंबकम् की भावना आज भी उतने ही प्रासंगिक है जितने प्राचीन काल में थे | यह शोधपत्र इस बात का विश्लेषण करता है कि, किस प्रकार वैश्वीकरण के युग में भी ये पारंपारिक मूल्य भारतीय समाज के नैतिक, सांस्कृतिक और सामाजिक ताने-बाने को सृदृढ बनाये रखने में सहायता करती है |
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