विकसित भारत 2047 – समग्र सतत विकास की ओर अग्रसर राष्ट्र
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- 1. सहायक आचार्या,हिन्दी विभाग,जैन (मानद विश्वविद्यालय) एस ओ एस, जे सी रोड , बेंगलोरे
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सारांश
हैं वायु-मण्डल में हमारे गीत अब भी गूंजते,
निर्झर, नदी, सागर, नगर, गिरि, वन सभी हैं कूजते ।
देखो हमारा विश्व में कोई नहीं उपमान था,
नर-देव थे हम और भारत ? देव-लोक समान था ॥
भारत भारती, मैथिलीशरण गुप्त
भारत एक प्राचीन सभ्यता, समृद्ध संस्कृति और अद्वितीय विविधता वाला देश है। अपने गौरवशाली इतिहास में भारत को “सोने की चिड़िया” कहा गया, क्योंकि यह न केवल आर्थिक रूप से सम्पन्न था, बल्कि ज्ञान, विज्ञान, दर्शन और संस्कृति के क्षेत्र में भी अग्रणी रहा। यहाँ की भूमि उपजाऊ थी, प्राकृतिक संसाधनों की भरमार थी। भारत के व्यापारिक संबंध विश्व के अनेक देशों से स्थापित थे। भारतीय सभ्यता में कला, विज्ञान, और साहित्य की उल्लेखनीय प्रगति हुई थी, जिसने दूर-दूर के देशों से विद्वानों और यात्रियों को यहाँ आने के लिए प्रेरित किया। प्राचीन भारत सोने, चाँदी, मसालों और रेशम जैसे मूल्यवान वस्तुओं के व्यापार का प्रमुख केंद्र था। परंतु औपनिवेशिक काल में इसकी समृद्धि को गहरी क्षति पहुँची और स्वतंत्रता के बाद भारत ने पुनर्निर्माण की यात्रा आरंभ की।इसी दिशा में भारत के वर्तमान प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने 2047 तक भारत को एक विकसित, आत्मनिर्भर और समृद्ध राष्ट्र बनाने का संकल्प लिया है, वह केवल एक लक्ष्य नहीं, बल्कि हर भारतीय का साझा सपना है।
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