झारखंडी आदिवासी कविताओं में प्रकृति के विभिन्न रूप
Authors/Creators
- 1. नवगण कला, वाणिज्य एवं विज्ञान महाविद्यालय, परली वैजनाथ जि.बीड (महाराष्ट्र)
- 2. कला व विज्ञान महाविद्यालय चौसाळा, जि. बीड
Description
झारखंड का भौगोलिक परिवेश प्राकृतिक सौदर्यं से भरा हुआ है। इस प्रदेश में नदी, झरने, पहाड़, पेड़-पौधें एवं वन्यजीवों की खूबसूरती अलग से अंदाज में मिलती है। यहाँ पर पर्यटक इसी खूबी के कारण आते हैं। यहाँ पर कई जलप्रपात, बड़ी-बड़ी झीलें एवं जंगल सौदर्य दिखाई देता है। कई ऐसे गाँव हैं जहाँ पर झारखंडी अस्मिता का नजरा देखने को मिलता है। सरकार ने कई स्थलों को भारतीय पुरातत्त्व विभाग को सौप दिया है। इन सभी प्राकृतिक सौदर्यं के घटकों को वहां के आदिवासी कवियों ने बड़ी ही बखूबी से रेखांकित हैं। वे इस प्राकृतिक सौदर्यं में आनंद एवं दुःख की कई संवेदनशीलता को साँझा करना चाहते हैं। प्रस्तुत शोध आलेख में सरितासिंह बड़ाईक की ‘सावन’, निर्मला पुतुल की ‘बाँस’, वंदना टेटे की ‘कविताओं वाली नदी’ एवं रामदयाल मुंडा की ‘अगर तुम पेड़ होते’ जैसे प्रतिनिधिक कविताओं को ही समाविष्ट किया गया है। इन कवियों ने प्रकृति के विविध रूपों को केंद्र में रखकर कविताएँ लिखी हैं। उन सभी प्राकृतिक रूपों की विशेषताओं को प्रस्तुत शोध आलेख में विश्लेषित किया गया है।
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