सिंचाई के स्रोत और कृषि पर प्रभाव: शेखपुरा जिला के संदर्भ एक भौगोलिक अध्ययन
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इस शोधपत्र में शेखपुरा जिले में सिंचाई के स्रोतों, उनके वितरण प्रतिरूप तथा कृषि भूमि पर पड़ने वाले प्रभाव का अध्ययन किया गया है। जिले की कृषि प्रणाली मुख्यतः वर्षा पर निर्भर है, किंतु वर्षा की अनियमितता के कारण किसान नलकूप, कुएँ, तालाब एवं पारंपरिक आहर-पाइन प्रणाली जैसे विभिन्न सिंचाई साधनों का उपयोग करते हैं। हाल के वर्षों में नलकूप और बोरवेल आधारित भूजल सिंचाई का विस्तार हुआ है, जिससे कृषि भूमि की उत्पादकता तो बढ़ी है, लेकिन साथ ही भूजल स्तर में गिरावट जैसी समस्याएँ भी सामने आई हैं। सिंचाई के असमान वितरण के कारण कुछ क्षेत्रों में भूमि का गहन उपयोग होता है जबकि अन्य क्षेत्रों में फसल उत्पादन सीमित रह जाता है। खरीफ फसलों के लिए वर्षा जल और आहर-पाइन प्रणाली महत्वपूर्ण सिद्ध होती है, वहीं रबी फसलों के लिए नलकूप प्रमुख स्रोत हैं। परिणामस्वरूप कृषि भूमि के उपयोग में परिवर्तन देखा जा रहा है—धान, गेहूँ एवं दलहनी फसलों का क्षेत्र सिंचाई की उपलब्धता के अनुसार घटता-बढ़ता रहता है। अध्ययन से यह निष्कर्ष निकलता है कि शेखपुरा जिले में सतत कृषि विकास के लिए जल संसाधनों का संतुलित उपयोग, भूजल संरक्षण, और पारंपरिक सिंचाई प्रणालियों के पुनरुद्धार की आवश्यकता है।
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