गरीबी उन्मूलन से सुशासन तक: बिहार में नया 20 सूत्री कार्यक्रम की भूमिका का मूल्यांकन
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भारत जैसे विकासशील देश में गरीबी एक सतत सामाजिक-आर्थिक चुनौती रही है, जो केवल आय की कमी नहीं बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, आवास और सामाजिक अवसरों तक सीमित पहुँच जैसी बहुआयामी समस्याओं का द्योतक है। इस समस्या के समाधान हेतु भारत सरकार ने 1975 में 20 सूत्री कार्यक्रम प्रारंभ किया, जिसे सामाजिक-आर्थिक परिवर्तन की नई आवश्यकताओं के अनुरूप वर्ष 2006 में पुनर्गठित कर “नया 20 सूत्री कार्यक्रम” के रूप में लागू किया गया। अध्ययन का क्षेत्र बिहार का गया जिला है, जो सामाजिक-आर्थिक दृष्टि से पिछड़ेपन और असमानता की समस्या से प्रभावित रहा है। इस शोध में वर्णनात्मक पद्धति अपनाई गई तथा 50 उत्तरदाताओं से प्राथमिक आंकड़े प्रश्नावली और साक्षात्कार के माध्यम से संकलित किए गए। विश्लेषण से ज्ञात हुआ कि 72 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने कार्यक्रम को जीवनस्तर सुधारने में सहायक बताया। प्रधानमंत्री आवास योजना, मनरेगा, उज्ज्वला योजना और स्वच्छ भारत मिशन जैसी योजनाओं ने रोजगार, आवास और स्वच्छता की स्थिति में सुधार किया। सुशासन के संदर्भ में पारदर्शिता और सेवा वितरण में उल्लेखनीय सुधार देखा गया, जबकि जवाबदेही और जनसहभागिता के क्षेत्र में सुधार की आवश्यकता बनी रही। नया 20 सूत्री कार्यक्रम गया जिले में गरीबी उन्मूलन और सुशासन को सशक्त बनाने की दिशा में प्रभावी रहा है। यदि निगरानी, सूचना प्रसार और उत्तरदायित्व को और सुदृढ़ किया जाए, तो यह कार्यक्रम बिहार के ग्रामीण विकास और समावेशी शासन का एक सफल मॉडल सिद्ध हो सकता है।
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