Published September 30, 2025 | Version v1

केदारनाथ सिंह के काव्य में गाँव

Description

के दारनाथ स िंह की ग्रामीण जीवन पर आधाररत कववताएाँ भोजपुरी के लोक अिंचल े अपनी ववषयवस्तु और िंवेदनाएाँ ग्रहण करती हैं। वे लोकजीवन की बोली, मुहावरों,शब्दों, लोकगीतों को कववता में ढालते हैं। ‘पिंचतिंत्र’ की शैली के अनुकरण में कववताओिं का ृजन करते हैं। ग्रामीण जीवन पर सलखी कववताओिं में प्रकृ सत, पशु-पक्षी, पयाावरणीय सचिंताएाँ, पररवेश लोकजीवन, ामूहहकता की भावना, मानवीय िंवेदनाओिं आहद की शक्त उपस्स्थसत है। उनके ग्रामीण जीवन के पात्र जीविंत लगते हैं। हक ानी िंस्कृ सत के सचत्र, आशा- आकािंक्षा, उनके दुःु ख-ददा कववता में असभव्यक्त हुए हैं। के दारनाथ स िंह की कववताओिं में गााँव का नकारात्मक पक्ष भी आया है। गााँव े शहर की और पलायन को वे एक बड़ी मस्या के रूप में देखते हैं। जासतवाद, स्ियों के प्रसत वपतृ त्तात्मक ोच, अभाव, वपछड़ापन जै ी मस्याओिं पर भी उन की दृवि जाती है। गााँव पर सलखी कववताएाँ पाठक की मानवीय िंवेदनाओिं को जगाती ह 

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