सहरिया जनजाति की पारंपरिक औषधीय प्रथाएँ और स्वास्थ्य संस्कृति: ललितपुर जिले के संदर्भ में
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भारत की सांस्कृतिक विविधता में जनजातियाँ एक अभिन्न अंग के रूप में स्थापित हैं, जिनमें सहरिया जनजाति का स्थान विशेष रूप से उल्लेखनीय है। भारत सरकार द्वारा 'विशेष रूप से दुर्लभ जनजातीय समूह' (PVTGs) के रूप में चिन्हित सहरिया समुदाय मुख्यतः उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और राजस्थान के वन क्षेत्रों में निवास करता है। यह जनजाति पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों, लोक-ज्ञान आधारित औषधीय प्रयोगों तथा वनस्पति-आधारित उपचारों के लिए जानी जाती है। पीढ़ियों से अर्जित इस ज्ञान का प्रयोग वे न केवल स्वास्थ्य देखभाल में करते हैं, बल्कि यह उनके जीविकोपार्जन का भी एक महत्त्वपूर्ण साधन है। तथापि, सामाजिक-आर्थिक पिछड़ेपन, शिक्षा की कमी, और आधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं की अनुपलब्धता ने इस समुदाय को आज भी अंधविश्वास, देवी-देवताओं पर निर्भरता, एवं घरेलू उपचारों तक सीमित कर रखा है। यह शोध सहरिया जनजाति की पारंपरिक औषधीय संस्कृति का विश्लेषण करते हुए, उनके स्वास्थ्य व्यवहार, सांस्कृतिक विश्वासों तथा आधुनिक चिकित्सा पद्धतियों से दूरी के अंतःसंबंधों को समझने का प्रयास करता है। यह अध्ययन इस पारंपरिक ज्ञान के संरक्षण की आवश्यकता तथा जनजातीय स्वास्थ्य में संस्कृति की भूमिका को उजागर करता है।
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