Published September 28, 2025 | Version REPR-Jul-Aug-Sep. 2025

बी.एड. प्रशिक्षुओं के शिक्षण कौशल के विकास में उनकी स्वयं की समझ का प्रभाव

  • 1. शोधार्थी, शिक्षाशास्त्र संकाय, मदर हुड विश्वविद्यालय, रूड़की, हरिद्धार
  • 2. प्रोफेसर एवं शोध निर्देशक, शिक्षाशास्त्र संकाय, मदरहुड विश्वविद्यालय, रूड़की, हरिद्धार

Description

शिक्षक की भूमिका विद्यालय तथा कक्षा के भीतर अधिक होती है परन्तु यह भूमिका कक्षा तथा विद्यालय से बाहर की दुनिया का निर्माण करती है। परन्तु इस भूमिका को सफलता पूर्वक निभाने के लिए भी उसमे कुछ आवश्यक कौशल होने चाहिए क्यूंकि यदि किसी कार्य में व्यक्ति सफल होना चाहता है उस सफलता को प्राप्त करना चाहता है तो उसका स्वयं से परिचय होना आवश्यक है। प्रस्तुत शोध पत्र का उदेश्य उत्तराखंड राज्य के देहरादून जिले में स्थित बी.एड. संस्थानो में अध्ययनरत बी.एड. प्रशिक्षुओं की स्वयं की समझ उनके शिक्षण कौशल को विकसित करने में सहायक है या नहीं, यह जानना है। किसी भी शिक्षक के लिए शिक्षण कौशल प्राप्त करना एक चुनौती है क्योंकि इसमे छात्र की व्यक्तिगत दृष्टि के अनुरूप शिक्षक को अपने शिक्षण कौशल का प्रयोग करना होता है। इस शोध पत्र के अंतर्गत शोधार्थी ने सर्वेक्षण विधि का उपयोग किया है। शोधार्थी ने स्वयं की समझ का प्रभाव शिक्षण कौशल पर देखने के लिए टी अनुपात की गणना की है तथा इसके परिणाम बताते हैं कि बी.एड. प्रशिक्षुओं की स्वयं की समझ उनके शिक्षण कौशल को साकारात्मक रूप से प्रभावित करती है।

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