राजीव गांधी किसान न्याय योजना से गोठानों के निर्माण से ग्रामीण रोजगार में वृद्धि - एक विश्लेषणात्मक अध्ययन
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छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा शुरू की गई गोठान योजना राज्य की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक क्रांतिकारी पहल है। गोठानों के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में पशुपालन, वर्मी कम्पोस्ट, गौमूत्र आधारित उत्पाद, हस्तशिल्प, बागवानी एवं अन्य कृषि आधारित गतिविधियों को बढ़ावा दिया गया है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण रोजगार सृजन, महिला सशक्तिकरण, युवाओं को कार्य के अवसर प्रदान करना तथा स्थानीय स्तर पर पलायन को रोकना है। इस शोध-पत्र का प्रमुख उद्देश्य गोठानों के निर्माण से उत्पन्न रोजगार अवसरों का अध्ययन करना है। अनुसंधान से प्राप्त तथ्यों के अनुसार, गोठानों ने ग्रामीणों को न केवल स्थायी आजीविका दी है, बल्कि उनके परिवार की आय में भी वृद्धि की है। गोठानों से जुड़ी गतिविधियों जैसे वर्मी कम्पोस्ट उत्पादन, पशुपालन, कृषि सहायक कार्यों एवं गो-आधारित उत्पाद निर्माण ने ग्रामीणों के लिए नये रोजगार के द्वार खोले हैं। विशेष रूप से महिलाओं और युवाओं को स्वावलंबी बनने के अवसर प्राप्त हुए हैं। इस अध्ययन से यह निष्कर्ष निकलता है कि गोठान योजना ने न केवल ग्रामीण रोजगार में वृद्धि की है, बल्कि ग्राम अर्थव्यवस्था को भी सशक्त बनाया है। यह शोध भविष्य में ग्रामीण विकास की नीतियों के लिए एक महत्वपूर्ण दिशा प्रदान कर सकता है।
मुख्य शब्द - गोठान योजना, ग्रामीण रोजगार, महिला सशक्तिकरण, पशुपालन गतिविधियाँ, ग्राम अर्थव्यवस्था
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