चिपको आन्दोलन का सांस्कृतिक महत्व
Authors/Creators
- 1. शोधार्थी राजनीति विज्ञान विभाग सोबन सिंह जीना विष्वद्यिालय अल्मोड़ा
- 2. शोधार्थी अर्थषास्त्र विभाग सोबन सिंह जीना विष्वद्यिालय अल्मोड़ा
Description
चिपको आंदोलन का सांस्कृतिक महत्व समाज प्रकृति और परंपरा के बीच के गहरे संबंध को उजागर करता है। यह आंदोलन सिर्फ एक पर्यावरणीय प्रयास नहीं था बल्कि भारतीय संस्कृति की उन मूलभूत मान्यताओं का प्रतीक था जो प्रकृति को मां के रूप में पूजनीय मानती हैं। चिपको आंदोलन (1973) भारत का एक ऐतिहासिक पर्यावरणीय आंदोलन था, जिसकी शुरुआत उत्तराखंड (तत्कालीन उत्तर प्रदेश) के कुमाऊं क्षेत्र के गाँवों में हुई थी। इस आंदोलन का उद्देश्य पेड़ों की अंधाधुंध कटाई के खिलाफ विरोध करना था, जो पर्यावरण और स्थानीय जीवन के लिए खतरे की ओर इशारा कर रही थी। चिपको आंदोलन भारत में 1970 के दशक में शुरू हुआ एक पर्यावरणीय और सामाजिक आंदोलन था, जिसका उद्देश्य जंगलों की कटाई को रोकना और पर्यावरण की रक्षा करना था। यह आंदोलन उत्तराखंड (तब उत्तर प्रदेश) के ग्रामीण क्षेत्रों में शुरू हुआ और इसका नेतृत्व मुख्य रूप से महिलाओं ने किया। चिपको आंदोलन का उद्देश्य वनों की कटाई को रोकना और पेड़ों को बचाना था, क्योंकि जंगलों की कटाई से पर्यावरणीय असंतुलन, भूमि कटाव और संसाधनों की कमी हो रही थी। इस आंदोलन का प्रसिद्ध नारा था: "क्या हैं जंगल के उपकार, मिट्टी, पानी और बयार। मिट्टी, पानी और बयार। ftank jgus ds vk/kkj"A 1973 में यह आंदोलन चमोली जिले के मंडल गांव में शुरू हुआ, जब ठेकेदारों को वनों की कटाई का अधिकार दिया गया। स्थानीय लोग, विशेष रूप से महिलाएं, पेड़ों से चिपककर खड़ी हो गईं ताकि ठेकेदार पेड़ों को काट न सकें। गौरा देवी, एक स्थानीय महिला ने, इस आंदोलन का नेतृत्व किया। उनके साथ अन्य महिलाओं ने पेड़ों से चिपककर कटाई रोकने का साहसिक कदम उठाया। चिपको आंदोलन ने देशभर में पर्यावरण संरक्षण की जागरूकता फैलाई। 1980 में, भारत सरकार ने हिमालयी क्षेत्रों में वनों की कटाई पर 15 साल का प्रतिबंध लगाया चिपको आंदोलन ने पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक नई सोच दी और महिलाओं की भागीदारी को भी उजागर किया। यह आंदोलन आज भी पर्यावरणीय आंदोलनों के लिए प्रेरणा का स्रोत है चिपको आंदोलन ने दिखाया कि जब समुदाय एकजुट होकर अपने संसाधनों की रक्षा के लिए खड़ा होता है, तो बड़े बदलाव संभव हैं। यह प्रकृति के साथ सामंजस्यपूर्ण संबंध बनाए रखने का संदेश देता है।Bottom of Form
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