भारत के प्रारंभिक ऐतिहासिक चरण का पुरातात्विकअध्ययन
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भारत में प्रारंभिक ऐतिहासिक चरण के पुरातात्विक इतिहास का अध्ययन भारतीय उपमहाद्वीप की सभ्यता, संस्कृति, सामाजिक संरचना, धार्मिक विश्वासों तथा राजनीतिक विकास को समझने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह काल लगभग 6ठी शताब्दी ईसा पूर्व से लेकर गुप्त साम्राज्य के उदय (लगभग चौथी शताब्दी ईस्वी) तक माना जाता है। इस समयावधि में भारतीय समाज लोहे के उपयोग, नगरों के विकास, राज्य निर्माण, लेखन प्रणाली के विकास, व्यापार के विस्तार और धार्मिक आंदोलन के उद्भव जैसे कई महत्वपूर्ण परिवर्तनों से गुजरा। इस काल की सबसे उल्लेखनीय विशेषता यह थी कि यह एक ऐसा संक्रमण काल था जिसमें प्रागैतिहासिक और ऐतिहासिक समाजों के बीच की खाई को पाटा गया। इस समय से जुड़े पुरातात्विक साक्ष्य—स्थलों की खुदाई, अभिलेख, मुद्राएँ, मूर्तियाँ, वास्तुशिल्प अवशेष, सिक्के आदि—हमें तत्कालीन समाज की झलक प्रदान करते हैं।प्रारंभिक ऐतिहासिक चरण के पुरातात्विक साक्ष्य हमें मुख्यतः उत्तर भारत, विशेषकर गंगा की घाटी और उसकी सहायक नदियों के किनारे बसे क्षेत्रों से प्राप्त होते हैं। इस काल में शहरीकरण की प्रक्रिया पुनः प्रारंभ हुई और जनपदों तथा महाजनपदों के रूप में राज्य व्यवस्था विकसित हुई। मगध, कोशल, अवंति, वत्स जैसे शक्तिशाली महाजनपदों ने भारतीय उपमहाद्वीप में राजनीतिक अस्थिरता को समाप्त कर केंद्रीकृत प्रशासन की नींव रखी। इस युग के पुरातात्विक स्थलों में वैशाली, अतरंजीखेरा, कौशांबी, श्रावस्ती, राजगृह, पाटलिपुत्र, चम्पा, उज्जैन, तक्षशिला आदि प्रमुख हैं। यहाँ से प्राप्त ईंटों के निर्माण, नगर नियोजन, नालियों की व्यवस्था, अन्न भंडारण की संरचनाएं, कुम्हार के चाक से बनी वस्तुएँ, लौह उपकरण आदि यह दर्शाते हैं कि यह युग तकनीकी दृष्टि से विकसित हो रहा था।इस काल की एक विशेषता यह भी रही कि लेखन प्रणाली का प्रचलन आरंभ हुआ। ब्राह्मी और खरोष्ठी लिपियाँ इस काल में विकसित हुईं, जिनका उपयोग अशोक के शिलालेखों में प्रमुखता से हुआ। ये लिपियाँ भारतीय इतिहास को लिखित रूप में दर्ज करने की दिशा में पहला ठोस कदम थीं। अशोक के अभिलेख
जो विभिन्न भाषाओं और लिपियों में पाए गए हैं, यह सिद्ध करते हैं कि इस समय राजनीतिक नियंत्रण, धार्मिक प्रचार और प्रशासन के लिए लेखन का व्यापक उपयोग हो रहा था। ब्राह्मी लिपि से ही आगे चलकर नागरी लिपि का विकास हुआ जो आधुनिक देवनागरी की पूर्वज है।
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