आत्मकथा विधा में सामाजिक समस्याएँ
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- 1. अँड . बी. डी . हंबर्डे महाविद्यालय आष्टी तालुका. आष्टी, जिला. बीड
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सारांश-
हिंदी साहित्य में आत्मकथा एक ऐसी विधा है जिसमें लेखक अपने जीवनानुभव, संघर्ष, विचारधारा और सामाजिक परिवेश को अभिव्यक्त करता है। समय के साथ आत्मकथाओं की भाषा, शिल्प, दृष्टिकोण और विषयवस्तु में महत्वपूर्ण परिवर्तन हुए हैं। प्रारंभिक आत्मकथाओं में राष्ट्रवाद, नैतिक आदर्श और धार्मिकता का चित्रण मिलता है, जबकि आधुनिक आत्मकथाओं में व्यक्तिगत संघर्ष, आत्मविश्लेषण, सामाजिक भेदभाव और लैंगिक असमानता प्रमुख विषय बनकर उभरे हैं। दलित और स्त्री आत्मकथाएँ विशेष रूप से सामाजिक अन्याय, जातिगत भेदभाव, घरेलू हिंसा और शिक्षा व आर्थिक स्वतंत्रता के महत्व को उजागर करती हैं। कावेरी की “टुकड़ा-टुकड़ा जीवन” जैसी आत्मकथाएँ न केवल व्यक्तिगत पीड़ा और विद्रोही चेतना का चित्रण करती हैं, बल्कि सामाजिक संरचना की आलोचना और परिवर्तन की आवश्यकता को भी सामने रखती हैं। इस प्रकार आत्मकथा केवल व्यक्तिगत अनुभव नहीं, बल्कि सामाजिक यथार्थ का सशक्त दर्पण बन जाती है।
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