Published October 7, 2025 | Version v1

क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक के ऋणों और गैर निष्पादित परिसंपत्तियों का विश्लेषणात्मक अध्ययन

  • 1. हेमचंद यादव विश्वविद्यालय, दुर्ग, (छ.ग.).
  • 2. भिलाई महिला महाविधालय, भिलाई नगर, दुर्ग, (छ.ग.).
  • 3. कल्याण स्नातकोत्तर महाविधालय, भिलाई नगर, दुर्ग, (छ.ग.).

Description

यह शोध एक क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक (छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण बैंक) के ऋण एवं अग्रिम, सकल एनपीए तथा शुद्ध एनपीए का वर्ष 2015-16 से 2024-25 तक का विश्लेषण प्रस्तुत करता है। अध्ययन पूर्णतः द्वितीयक आँकड़ों पर आधारित है, जो बैंक की वार्षिक रिपोर्टों, आरबीआई तथा नाबार्ड से संकलित किए गए हैं। इसमें ऋण वृद्धि, सकल एवं शुद्ध एनपीए की प्रवृत्ति तथा इनके मध्य सहसंबंध का परीक्षण किया गया है। परिणामस्वरूप यह स्पष्ट हुआ कि जहाँ ऋण एवं अग्रिम में निरंतर वृद्धि हुई है, वहीं सकल एवं शुद्ध एनपीए में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई है। सहसंबंध विश्लेषण से ज्ञात हुआ कि ऋण एवं अग्रिम और सकल एनपीए के बीच मध्यम ऋणात्मक संबंध है, जबकि ऋण एवं अग्रिम और शुद्ध एनपीए के बीच मजबूत ऋणात्मक संबंध पाया गया। यह दर्शाता है कि बैंक ने प्रभावी प्रावधान नीति और सुदृढ़ एनपीए प्रबंधन के माध्यम से न केवल अपनी परिसंपत्ति-गुणवत्ता को बेहतर बनाया है, बल्कि वित्तीय स्थिरता एवं ऋण वितरण क्षमता को भी सुदृढ़ किया है।

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