शाला-त्याग की समस्या के संदर्भ में विद्यालयी छात्रों हेतु भारतीय ज्ञान परंपरा और बहुविषयक दृष्टिकोंण का एक अध्ययन
Description
इस शोध-पत्र का उद्देश्य विद्यालयी छात्रों में शाला-त्याग की समस्या के समाधान हेतु भारतीय ज्ञान परंपरा और बहुविषयक दृष्टिकोंण की भूमिका का विश्लेषण करना है। भारत में शाला-त्याग के कारण विविध हैं-आर्थिक, सामाजिक, पारिवारिक, भाषा-संबंधी, मनोवैज्ञानिक और पाठ्यचर्या-संबंधी। भारतीय ज्ञान परंपरा, जिसमें लोक-कला, योग, आयुर्वेद, वास्तु-शास्त्र, गणित, खगोल-ज्ञान और दार्शनिक दृष्टिकोंण सम्मिलित हैं, शिक्षण को सांस्कृतिक रूप से प्रासंगिक और रोचक बना सकती है। बहुविषयक दृष्टिकोंण शिक्षा को केवल पुस्तक-ज्ञान तक सीमित न रखकर जीवन-कौशल, मूल्य-आधारित शिक्षा और समस्या-समाधान क्षमता से जोड़ता है। साहित्य समीक्षा से स्पष्ट होता है कि जब शिक्षा विद्यार्थियों की सांस्कृतिक पृष्ठभूमि और अनुभव से जुड़ती है तो उनकी विद्यालय में निरंतरता और सहभागिता बढ़ती है। इसके अतिरिक्त, IKS आधारित गतिविधियाँ-जैसे योगाभ्यास, पारंपरिक गणितीय खेल, कृषि-आधारित प्रायोगिक कार्य, संगीत और लोक-कला-सीखने को आनंददायक बनाती हैं और शाला-त्याग की प्रवृत्ति को कम करती हैं। बहुविषयक दृष्टिकोंण, जैसे विज्ञान और कला का संयोजन, गणित और संगीत का संबंध, तथा पर्यावरण शिक्षा और सामाजिक अध्ययन का एकीकरण, छात्रों को विविध सीखने के अवसर प्रदान करता है। यह शोध दर्शाता है कि यदि विद्यालयों में भारतीय ज्ञान परंपरा और बहुविषयक दृष्टिकोंण को योजनाबद्ध ढंग से एकीकृत किया जाए, तो शाला-त्याग दर में कमी, छात्र की अभिरुचि में वृद्धि और सतत शैक्षिक विकास संभव है।