भारतीय ज्ञान परम्परा (IKS) के नैतिक एवं दार्शनिक आधार
Authors/Creators
- 1. शोधार्थी, शिक्षा संकाय, मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय, उदयपुर, राजस्थान, भारत
Description
भारतीय ज्ञान परम्परा (Indian Knowledge System - IKS) विश्व की सबसे प्राचीन और समग्र ज्ञान परम्पराओं में से एक है, जो केवल बौद्धिक ज्ञान तक सीमित न होकर जीवन के विविध पहलुओं – नैतिकता, धर्म, योग, दर्शन, कला, भाषा और पर्यावरण – में संतुलन और समरसता स्थापित करती है। IKS का उद्देश्य न केवल ज्ञान का संप्रेषण है, बल्कि व्यक्ति के मानसिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विकास के माध्यम से एक समावेशी एवं मूल्यनिष्ठ समाज की रचना करना भी है। आधुनिक शिक्षा प्रणाली में IKS की प्रासंगिकता विशेष रूप से चरित्र निर्माण, पर्यावरणीय चेतना, सामाजिक जिम्मेदारी, और सतत विकास जैसे क्षेत्रों में उभर कर सामने आती है। यह प्रणाली विद्यार्थियों में न केवल ज्ञान, बल्कि व्यवहारिक निर्णय क्षमता, सहिष्णुता और सह-अस्तित्व की भावना भी उत्पन्न करती है। वर्तमान समय में IKS का पुनरावलोकन और पुनःस्थापन न केवल सांस्कृतिक जागरूकता को पुनर्जीवित करता है, बल्कि वैश्विक स्तर पर नैतिक और स्थायी विकास के लिए मार्गदर्शन भी प्रदान करता है।
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