हिन्दी उपन्यासों में नारी चेतना की पूर्व पीठिका
Description
इस शोध पत्र में हिन्दी उपन्यासों में नारी चेतना के विकास की परिप्रेक्ष्य को प्रस्तुत किया है। लेख में यह बताया गया है कि कथाकारों ने स्त्री-विमर्श से जुड़ी कथाएँ लिखकर महिला आंदोलन में महत्वपूर्ण योगदान दिया। महिला आंदोलन ने न केवल भारत में, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपने कदम जमाए हैं। इस आंदोलन में विभिन्न सामाजिक वर्गों – जैसे दलित, कामकाजी, मजदूर, निम्न मध्यमवर्ग और उच्च मध्यवर्ग – की महिलाएं शामिल हैं, जिन्होंने एक-दूसरे के संघर्ष और समस्याओं को समझने की कोशिश की। लेख में यह भी दर्शाया गया है कि महिला आंदोलन का संबंध स्वाधीनता संग्राम से भी है, जहां महिला ने सामाजिक-आर्थिक ढाँचे को हिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसके अतिरिक्त, महिला आंदोलनों के विभिन्न समूहों का परिचय देते हुए उनके कार्यों और उद्देश्यों पर भी चर्चा की गई है। यह शोध उपन्यासों के माध्यम से नारी चेतना के विभिन्न पहलुओं को समझाने का प्रयास करता है, साथ ही यह स्पष्ट करता है कि महिला आंदोलन की शुरुआत केवल हाल ही में नहीं, बल्कि वर्षों से विभिन्न रूपों में हो रही है।
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